Author: naee rahen naee ummiden

मैं देश बचाने आया हूं

मैं देश बचाने आया हूँ।पहन वर्दी और बांध तिरंगा सिर पे,वतन की रक्षा के लिए, निकल पड़ा हूँ घर से।होली दीवाली,ईद मुहर्रम वतन के साथ मनाने आया हूँ,दूर रहो …

नए युग का आरंभ

नए युग का आरंभवर्षों से प्रदूषित गंगा,आज स्वच्छ धारा बहा रही,काले पानी का कलंक,यमुना भी जैसे मिटा रही,गा रहे पंछी नीले गगन में,प्रकृति अपना सौंदर्य दिखा रही,झूम रहे वन …

हां मैं एक मजदूर हूं

बना नहीं सकता महल अपनापर पूरा करता दूसरों का सपनाश्रेय नहीं मिलता मुझे काम काइमारत बनता मालिक के नाम काअपने मालिक का गुरूर हूंगुमनामी में भी मगरुर हूंहां मैं …