Author: नि. शार्दुल "हक़"

गुण्डे चूहे

गुण्डे चूहे मेरे घर के गुण्डे चूहे, मस्त-मस्त मुश्टण्डे चूहे, पाव, रोटी, बिस्कुट खाते, दाल-भात सब चट कर जाते, केक-पेस्ट्री सन मौज उड़ाते, साबुन, टूथपेस्ट को ले जाते हैं, …

वन महोत्सव

वन महोत्सवआओ मिलकर वृक्ष लगाएँ,मिलकर करें रखवालीपेड़ काटने वालों से पूछें हमबनकर एक सवाली।‘आज पेड़ जो काट रहे हो,क्या तुमने कभी ये सोचा?’‘कितने वृक्ष लगाए जीवन में?’,‘क्या तुमने खुद …