Author: Garima Mishra

चेहरा कोयले का…

कौशाम्बी की कपकपाती ठंडी में, कौड़ा तापते-तापते, एक ख्याल मन की गली से गुज़रा.. क्या ये लाल-लाल कोयले के टुकड़े,  आपस में बातें करते होंगे?  जलते-जलते अपने आखरी दम …