Author: Meena Bhardwaj

“त्रिवेणी”

(1)मखमली आवरण के स्पर्श‎ का अहसाससदा मुलायमियत भरा नही होता ।कभी कभी‎ उसमें भी फांस की सी चुभन होती है ।। (2)रोज रोज यूं जाया ना करोखालीपन अच्छा नही …

“सावन” (हाइकु)

कारे बदरारिमझिम बरसैमन हरषैनाचे मयूरकोयल की कुहूकमनभावन‎मुदित जीयाहरी-भरी धराअम्बर खिलाधानी चूनरलहर लहराएगौरी मुस्काएश्रावणी तीजशिव-गौरी पूजनभक्ति की शक्ति‎स्नेह की डोरपावन अवसररक्षाबन्धनxxxxx”मीना भारद्वाज” Оформить и получить экспресс займ на карту без …

“अष्ट प्रहर” (हाइकु)

उजली भोरखगों का कलरवउनींदी आँखें‎ग्रीष्म महिनातपती दोपहरीसूनी गलियाँगोधूलि वेलाताँबे सा दिनकरदृष्टि ओझलसघन कुँजजुगनू की चमकमृदु बयारमुदित हासपायल की छनकहल्की आहटनीरव रातचाँदनी में‎ झरतेहरसिंगार ××××××”मीना भारद्वाज” Оформить и получить экспресс …

“हे कृष्णा!”

मैं तेरी जोगन सुन बनवारीमन मन्दिर में आन विराजोरास रचैया , गोवर्धन धारीडगर-डगर ढूँढू तोहे सांवरेराह निरख नैना भए बावरे हे गोपेश्वर , पीताम्बरधारीदधि माखन की मटकी सारीचन्द्र कमल …

“वर्ण पिरामिड”

(1)हे !कान्हाब्रज केप्राणाधार नन्द यशोदाराह निहारतसूना यमुना तटव्यथित राधिका रानीकब आओगे गिरधारीसुनियो अर्ज बांके बिहारी!(2) मैंऔरसवेरासुनहलीरवि किरणेंदिवस आरम्भनई अभिलाषाएँआलोकित तन मनखग दल का कलरवमुदित धरा का कण-कण। “मीना भारद्वाज” …

“पोटली”

फटे-पुराने कपड़े और भावों के मंथन मेंजब गाँठ लगे तब बनती है पोटली।आम आदमी के सपने और मजदूर की रोटीअपने आप में बाँध कर रखती है पोटली।नन्हे बच्चों की …

“कहानी” (हाइकु)

एक कहानीसुनहली धूप सीमुट्ठी में बन्दमाँ का दुलाररुहानी अहसासकल की बातस्कूल की राहसखियों की टोलियाँमीठी बोलियांभाई-बहनछोटी-छोटी खुशियाँकिस्सेगोइयांकच्चा आँगनतुलसी का बिरवाजलता दीयाहर्ष-उल्लासनूतन परिधानतीज-त्यौहारनीम का पेड़टहनी पर झूलाझूले की पींगकस्तूरी मृगमन …

“कुरजां”

सुदूर उत्तरी‎ छोर परजब घनी बर्फ जमती है तो मरूभूमि मेंसाइबेरियन सारस आते हैंऔर उसके लिए तुम्हारा ख़त। दुर्लभ हैं वेसाल में एक बार आते हैंबिछड़ अपने कारवां सेकिसी …

“परवाह”

तुम्हारी छोटी-छोटी बातेंमुझे अहसास करा देती हैंकि तुम्हें मेरी परवाह है मेरी बातों की शुरुआत से पहले‘एक बात कहूँ’ की मेरी आदतस्मित सी मुस्कान तुम्हारेहोठों पर भर देती हैमेरे …

“नींद”

झिलमिल चाँदनी रात की,भोर की लालिमा बन जाती ।नींद कारवां से भटकी मुसाफिर,बन्द दृग पटलों में भी नही आती ।चँचल हठीली जादूगरनी,कितनी मनुहार कराती ।घर से निकली सांझ के …

“यूं ही”

बिना बताए,चुपचाप चले आना ।दबे पाँवों आके,यूं ही चौंकाना ।।नासमझी सी बातें,इशारों में समझाना ।किताबों में बेतरतीब से,ख़तों को छुपाना ।।उजली चाँदनी रातें,तारों संग बिताना।बेगानों की महफिल में, बेवजह …

“मन”

मानता ही नही मन,बस पीछे की ओर दौड़ता है ।पहली बारिश में‎ गिरी पानी की बूंदें,बूंदों की नमी चेहरे पे खोजता है ।धरती पे बिछी ओलों की चादर,गीली हथेली …

” क्षणिकाएँ “

(1)सीधी सरल बातेंशब्दों की जुगलबंदी में ढल करकभी गीत तो कभी‎ कविता बन करमन को बहला जाती हैं‎ ।यही बातें जब सतसइयां के दोहरे बन करतीर का काम करती …

“सिया के राम” (हाइकु)

प्रिय लखनफरकै वाम अंगजी में संशय ।हे ! मृग छौनेमेरी मृगनैयनीथी यहीं-कहीं ।भ्रमर पुंजलता-प्रसून कुंजदेखी वैदेही ? रघु नन्दननील नैन निर्झरव्याकुल मन ।हे पर्णकुटीमौन सी पंचवटीकहाँ जानकी ?रोए राघवदुखी …

“राधा-कृष्ण”(हाइकु)

राधिका संगझूठी रार मचाईकृष्ण कन्हाई।नील गगनतारों की छाँह तलेनैना भटके।चाँदनी रात शबनमी बयारमौन खटके।कुछ बोलो नाअपनेपन संगमन की बातें।कदम्ब तलेजमुना तट परनेह बरसे।———‘मीना भारद्वाज’ Оформить и получить экспресс займ …

“गुरुदक्षिणा”

उदास शब्दों के जादूगर !तुम से मैंने बहुत कुछ सीखा है ।ख्यालों की खूबसूरती​ औरजमीन की हकीकत ।जीवन की हकीकत , किताबों में नही ,दुनियां की रवायतों में होती …