Author: कुमार मुकुल

हजार दरवेश

वह अपने लंबे बालों को छाँट लेती है पॄथ्वी से दूरी बना लेने का यह उसका तरीका है । उसे अपने रोजानामचे में शामिल करना है आकाश के सितारों …

दादा जी की संदूक

मेरे पिता को याद हैं चमङे के बेल्ट से बँधी ये घंटियाँ जब दूर से सुनाई पङती दादा जी पानी मिलाते नाद में जान जाते गोला बैल लौटते हुए …

फेशबुक – एक आत्‍मालोचना

अपना चेहरा उठाए खडे हैं हम बारहा मुकाबिल आपके अब आंखें हैं पर द़ष्टि नहीं है मन हैं पर उसकी उडान की बोर्ड से कंपूटर स्‍क्रीन तक है काम …

चरवाहे शहंशाह बन सकते हैं

चरवाहे शहंशाह बन सकते हैं बने हैं शहंशाह शहंशाह बन नहीं सकता चरवाहा चाहकर भी तानाशाह बन सकता है वह भोला-भाला व्‍यक्ति बन सकता है पंडित ज्ञानी विराट ज्ञानी …