Author: KaviKrishiv

‘नवभारत की मांए’ – कविकृशिव

ll  भारत में जन्मी हिंदी और उर्दू की दशा पर कुछ पंक्तिया  llएक माँ की दो बेटी,  सज सवंर के आई थीशायरी कवाली तहजीब में लिपटी,  काव्य कविता लायी …

‘मेरी बेटी’ – कविकृशिव

मेरी  बेटी  मुझसे  है  कहती,   काश  मैं  एक  तितली  होतीरंग  बिरंगे  पंखो  के  संग,    मैं  भी   घर  से  निकली  होतीफूलो  पर  इठलाती  इतराती,   पत्तो  पर  से  फिसली  होतीखुले  गगन  …