Author: Ajay Kumar Mallah "Karuna"

दिल अब भी करीब है – अजय कुमार मल्लाह

कुछ दूर हूं मै उससे, कुछ दूर है वो मुझसे,पर ये भी सच है कि, दिल अब भी करीब हैं।हूँ जानता हकीक़त कि वो मेरी नहीं है अब,फिर क्यूं …

तूने दिल तोड़ा क्यूँ ऐसे – अजय कुमार मल्लाह

कुछ पा नहीं पाया कुछ खो नहीं सकता,तुने दिल तोड़ा है ऐसे कि मैं रो नहीं सकता,यकीं होता नहीं दिल को कहे ये हो नहीं सकता,तुने दिल तोड़ा है …

आशा तुम्हारी याद ने – अजय कुमार मल्लाह

नींद आँखों से उड़ाकर जगाया है बहुत,चैन दिल से मेरे चुराकर सताया है बहुत,सुनो आशा तुम्हारी याद ने रुलाया है बहुत।अपने नासमझ दिल को समझाया है बहुत,ख़्वाब-ओ-हक़ीक़त में फ़र्क …

आशा बहुत है – अजय कुमार मल्लाह

आती नहीं रूबरू हकीक़त में उसे तलाशा बहुत है,उसके ना होने से मेरी जिन्दगी में निराशा बहुत है,कब वो ख़्वाबों से निकल कर मेरे सामने आएगी,उसके दीदार की मेरे …

आशिक़ तुम्हारा हूँ – अजय कुमार मल्लाह

आँसुओं में लिपटकर के निकल जाऊंगा आँखों सेअपनी आँख का मुझको वो काजल समझती हो,आता है गरजना सिर्फ बरसना याद नहीं जिसकोबेवजह जो करता शोर है वो बादल समझती …

सजना सँवरना भी – अजय कुमार मल्लाह

यौवन की माया है तेरी कंचन सी काया है, तूने तासीर-ए-हुस्न में बहुतो को सताया है, सूख जाएगा एक दिन यौवन का झरना भी, तब यकीनन भूल जाएगी सजना …

सँवरना आता है – अजय कुमार मल्लाह

फ़र्क पड़ता नहीं कदमों पर मेरे समझाने का,इन्हें तो बस तेरी गली से गुज़रना आता है।है तुझे अपना ख़याल मगर मेरी परवाह नहीं,मेरी हर बात पर तुझको तो मुकरना …

अकबर-प्रताप संवाद – 1 – अजय कुमार मल्लाह

अकबर – मृग के जैसी मौत मिले, जब सिंह से लड़े सियार, हम हैं ख़ुद राजाओं के राजा, तुम हो राजकुमार।प्रताप – अभी तो जंग शुरू हुई है, बंद …

इज़ाफा – अजय कुमार मल्लाह

वो गुज़री तो कल थी खुश्बू अब भी है राहों में, कि ख़्वाहिश है मेरी इतनी रहूँ उसकी पनाहों में, क्या पता उसे पाकर मै थोड़ा सा सँभल जाऊँ, …

दर्द जुदाई का – अजय कुमार मल्लाह

महफ़िल महफ़िल यही शोर है,तेरी ज़िन्दगी में कोई और है।ये दीवानगी है कि आवारगी है,भटकता मुसाफ़िर नहीं ठौर है।पलकें झुकाकर रो कर, रूला कर,छोड़ गयी तु मुझे लब-ए-ग़ौर है।कसम …

तन्हाई अच्छी है – अजय कुमार मल्लाह

ख़्वाहिश नहीं खुदा से मिलूं ये ख़ुदाई ही अच्छी है,बरकत-ए-इश्क़ दूरियों में है तो जुदाई ही अच्छी है, ग़मजदा होकर बिखरूँ अब हिम्मत नहीं रही मुझमें,महफ़िलों का शौक़ नहीं …

मोहब्बत की शायरी – अजय कुमार मल्लाह

(1)उसके लबों की ख़ामोशियाँ कुछ बता रहीं थीं,जब वो छोड़कर मुझे तन्हा कहीं जा रही थी,मैं ही पागलों की तरह ये दिल्लगी कर रहा था,मत करो मुझसे इतनी मोहब्बत …

कुछ ऐसा चाहता हूँ – अजय कुमार मल्लाह

मुझे मेरे हिस्से का इश्क़ मयस्सर क्यूं नहीं, खुदा तुझसे इस बात का जवाब चाहता हूँ।मालूम तो पड़े कीमत मुझे मेरे अरमानों की, टूटकर बिखरते सपनों का हिसाब चाहता …

सच्चा प्यार – अजय कुमार मल्लाह

————– (1) —————मनचाहा प्यार मिले सबको, ऐसी किस्मत नहीं होती, बंदिशें तोड़कर अपनाए, इतनी हिम्मत नहीं होती, रौंद जाते सब अरमान और छोड़ जाते हैं तन्हा, ऐसे तोड़ते हैं …

अंजाम-ए-वफ़ा – अजय कुमार मल्लाह

हमको तो अंजाम-ए-वफ़ा ख़ूब है मालूम।हम इश्क़ निगाहों में अब पलने नहीं देंगे।।एवज़ में मोहब्बत के लोग देते हैं कज़ा। परवाने को फ़ानूस में जलने नहीं देंगे।।दिल को बनाकर …

मुझको छोड़ के – अजय कुमार मल्लाह

मैं तलाशती रही इस सवाल का जवाब, कि क्यूं तोड़ गया वो मेरा हर ख़्वाब, हर पल भगवान से मांगा जिसे हाथ जोड़ के, वो चला गया क्यूं अकेला …

मिट्टी का खिलौना हूँ – अजय कुमार मल्लाह

मिट्टी का खिलौना है जिस्म लोगों की नज़र में, अब तो लगता नहीं अपना कोई भी इस शहर में, पता पूछती फिरती हूँ कोई बता दे मौत का, फांसी …

तेरे ग़म को बांट लूं – अजय कुमार मल्लाह

तेरे ग़म को बांट लूं तो हासिल हो जाए जन्नत,मिले तु जो रब से मांग लूं तो पूरी हो जाए मन्नत,वक़्त भी थम कर कहे आ थाम ले तु …

उलझन – अजय कुमार मल्लाह

मैं तो लड़खड़ाता हूँ तु चलता चाल में होगा, नहीं मालूम है मुझको तु किस हाल में होगा।सपने जागती आँखों से देखने की आदत है, सोचता हूँ कि तु …

वो मुझमें रहती है – अजय कुमार मल्लाह

कल ख़्वाब में मिली मुझसे तो कह रही थी वो, मेरी कुछ हरकतों से आजकल नाराज़ रहती है।मेरा यूं भीगना बरसात में अच्छा नहीं लगता, उसकी तबियत कई दिनों …

मै गुनहगार हो गया हूँ – अजय कुमार मल्लाह

समझ के खिलौना तोड़ा दिल, अब मै बेकार हो गया हूँ,सज़ा मोहब्बत की मिल रही है, मै गुनहगार हो गया हूँ।,हर सितम शौक से सहने को, मै तैयार हो …

तेरी याद में – अजय कुमार मल्लाह

हक़ीक़त से अलग होती है ख़्वाबों की दुनिया, मैं हर ख़्वाब में तुझसे मुलाक़ातें करता हूँ।मेरे सब दोस्त कहते हैं मैं हो गया हूँ पागल, जब आजकल तेरी तस्वीर …

तुझे पाने की ख़ातिर – अजय कुमार मल्लाह

तुझे खोकर अरमां दफन करना नहीं आया, तेरी खातिर सब रिश्तों से बगावत कर ली।सितारों की भीड़ मे था चाँद को चुना मैंने, पूरे वादे कर दिए और रफ़ाक़त …

तेरा नाम लिख दिया है – अजय कुमार मल्लाह

जहालत नहीं साबित की लिखकर कभी मीनारों पे, अक्सर मिटा देती हैं लहरें लिखे हुए नाम किनारों पे,मेरी नज़र में इससे महफूज जगह नहीं है “करुणा”, तेरा नाम लिख …

वो मेरी नही है – अजय कुमार मल्लाह

मेरे दोस्त तेरा कहना है कि वो मेरी नही है, आखिर ये दिल क्यूं माने कि वो मेरी नही है।देख! देख रही है उसकी तस्वीर भी मेरी तरफ़,उसने अब …