Author: K K JOSHI

लिखूं ना लिखूं

पिघलते पहाड़ों में बर्फ से ढके पत्तों में पानी के आंचल में सोचता हूं मैं लिखूं ना लिखूं। सुबह की किरणों में पंछियों के संगीतों में शबनम की बूंदों …

सूनी सड़क

आकाश में चमचमाती बिजली के संग देखे मैंने बादलों के रंग तेज हवाओं के हवाले पत्तियां भी मुरझाई। अनगिनत लहरें उठी सागर भी हुआ तंग खामोशी का निशान नहीं …

चट्टान

अपने घर के दरवाजे से  मैंने उफनते सागर को देखा  फूलों का था नहीं निशान  उस मरुस्थल को भी देखा॥ पत्थरों के आंगन में  कई लोग फुसफुसा के चले  …

बेशक

हवा में उड़ते पत्ते  बेशक बयान करते हैं  जिन्दगी एक ख़्वाब है  पतंग कटे ना कटे  डोर छूट जाया करती हैं।  सुबह की चाय संग  अखबारों के रंगों के …

तेरे परदेस में मेरा एक शहर होगा

तेरे परदेस में मेरा एक शहर होगा बादल होंगे बारिश का मौसम होगा सूरज की बंदिशों को दिखा आईना हरकदम साथ तो तेरा हमदम होगा तेरे परदेस में मेरा …

पाठशाला

किरणों का संसार है मेरी यह पाठशाला शिक्षा का रंग जहां नहीँ धर्मों कि माला गुरु भी ज्ञानी मेरे बहती ज्ञान की धारा आदर्शों का द्वार है एकता समता …

कमल की कलम भाग 7 आंसू

आंखो के रास्ते निकले जो पानी कीमत नहीँ होती उसकी कहानी तनहाइयों में होता है वो आवारा पतझड़ में घूमता मन बन बंजारा मुस्कानें भी हो जाती हैं बेमानी …

बेकसूर

हवाओं में आज एक हलचल है जाने क्यों पत्तों में सरसराहट है ये मौसम नहीँ अजीब आहट है बात कुछ नहीँ लेकिन चाहत है; फुटपाथ पर सोया मैं उठा …

तितलियां

रंग बिरंगी तितलियां उड़ रही आसमान में कितनी सुंदर प्यारी बैठी फूलों की दुकान में रंग बिरंगी तितलियां उड़ रही आसमान में। माँ ने मेरी एक बगीचा सजाया है …

नटखट चिड़िया

एक नटखट चिड़िया मेरे आंगन आती बीज बिखरे फसलों के कुछ थोड़े चुगते चुगते गीत मधुर वह गाती। एक नटखट चिड़िया मेरे आंगन आती सूरज की किरणों संग सुरों …

आरोहण

उस दिन बैठी हुई थी तुम अपने नयनों को झुकाये एकदम शांत व्याकुल मन में शून्य भाव लिये कितनी खूबसूरत थी तुम और वो पल भी मानो छुई मुई …

नया युग नई सोच

अद्भुत बात यह निराली आसमान में सजाई चंद्र ने सितारों की थाली, संध्या की चित्रकारी है या भोर की किलकारी पवन हर क्षण मनोहारी, मधुर एक आंगन बसाया भावों …

राजनीति या देशभक्ति

विभक्त करे जो देश स्वाभिमान है अपमान, बना विचित्र खेल बलिदानों का जन्मी आशंका, भुला दिया वो शहादत का किस्सा गांधी अहिंसा, बदली सोच आज बनी नमूना यादों को …

आवारापन

क्यों उम्मीदों के समन्दर में मोहब्बत के एहसास सजा रखे हैं वह कौन किनारा है जिसने दुनिया में रिश्ते बचा रखे हैं हमको मंजिल का पता कहां दूर वीरानी …

प्रेम

चंचल मन के गलियारे में प्रेम का स्मरण कराती तुम मीठी सी मुस्कान लिये कविता का सार बन आती तुम, बसंत के इस मौसम में गंगा की निर्मल धार …