Author: Kajalsoni

जिंदगी……. काजल सोनी

देकर ठोकरें जीना सिखाती है जिंदगीसच्चाई सबकी सामने लाती है जिंदगी।सिलसिला कुछ उतार चढ़ाव का देकरकभी हंसाती तो कभी रुलाती है जिंदगी।खोई थी मै तो इश्क के आगोश मेंदेकर …

होली (हायकु)……. काजल सोनी

होली आयी रेरंगों की भरमारउमड़े प्यारतरसे मनभीगते अंग अंगफैली उमंगफुले पलासमग्न मुग्ध आकाशजगाये आसनाचे गोपियांठुमके मेरो कृष्णारचाये रासछलिया पियापकड़े कमरियानचाये आजउड़े गुलालउपजे प्रेम रागमिटे संताप ” काजल सोनी “ …

दीया……. काजल सोनी

जलता है दीया…..चला है खुद जलकर दुजो को रौशन करने….दिखता नहीं उसे अपने ही तले का अंधेरा……पुछने पर बड़े प्यार से बोला…..जलाती है जिंदगी सबको मेरी तरह…..मिलेगी कलेजे को …

सितारा……… काजल सोनी

एक छोटा सा सितारा हूँ मैंजिसमें चांदनी जितनी भी चमक नहीं…..बस ये सोच कर जगमगा उठता हूँकि और भी हैं कितने सितारे….जिन्हें मेरी जितनी भीरौशनी नशीब नहीं……………. सोचा तो …

कली और माली……. काजल सोनी

कली – मेरी भीनी भीनी सी खुशबु मदहोश कर दे आँगन…… लिपटे मुझसे कांटे जिंदा है मेरा यौवन…….. मुझे तोड़ न तुम माली भौरा को तरसे मेरा मन……. ।माली …

किसान…….. काजल सोनी

रहता हूँ गाँव मेंकहलाता हूँ गँवार ।किसानी है पेशा मेराकभी व्यस्त तो कभी बेकार ।खपाता हूँ जीवन अपनाखपाया है परिवार ।अनाज का हर दाना दानामानता मेरा उपकार ।अन्न दाता …

मेरी कलम 10…..काजल सोनी

कामयाबी ने फरमान भेजाकि पा ले मुझे…..मगर जिम्मेदारी ने मेरेवहाँ तक पहुँचने न दिया…….!खुले दिल का थाजो हारता रहा सबसे…..मगर खुशमिजाजी ने मेरेमुझे तड़पने न दिया………!इश्क के आगोश मेंबैठा …

मेरी कलम 8…….काजल सोनी

मुश्किल घड़ी मेंअपने बड़े याद आते हैंमगर कोई अपने आते नहीं……।इंसान की गलतियों मेंलोग सभी समझाते हैंमगर उसे समझते नहीं…….।किसी की हार मेंलोग सभी हंसते हैंमगर हारे हुए को …

जमाना….. काजल सोनी

लोग डरते हैं जमाने से…..कि जमाना क्या कहेगा….और अक्सर फैसले बदल दिया करते हैं…..जो फैसला नहीं बदलते…..वो आशिक कहे जाते हैं या पागल…..पर जमाना जानता है….कि जमाने कि क्या …

” बुढ़ी माँ “…….. काजल सोनी

बुढ़ी माँ कोने में बैठी , अपना दर्द छुपाये ।रहीस बेटा बांटें सबको, माँ देख देख ललाये ।छुप छुप के ममता रोये , पर रहती है मुसकाये ।सुखी रोटी …

” मुझ सा ” …… काजल सोनी

मैं तो आदतन शराबी हूँ यारों मगर करता हूं हर बात ,अपने दिल से …… ।बेशक अकेला हूँ मगर रहता हूँतन्हाईयो के महफिल में…. ।हूँ हर पल एक मुसाफिरपा …

” हकीकत”……. काजल सोनी

परखने की कोशिश जरा सी….क्या की मैने अपनों को…..अपनों की भीड़ में….मै तो पराई हो गई ….. ।समझाने की कोशिश जरा सी…क्या कि मैंने गैरों को…..गैरों की भीड़ में….अपनापन …

जिंदगी की किताब…… काजल सोनी

तीन पन्ने हैं हमारी जिंदगी की किताब में….पहला पन्ना पलट चुका है जिसे हमदुबारा नहीं पलट सकते ……तीसरा पन्ना जो वक्त आने पर खुद ब खुद पलट जायेगा ………..रह …