Author: Hitesh Pal

सब्र

ज़रा सा सब्र मेरे मनतेरा भी इन्तज़ाम होगाबित जायेगा ये वक़्तफिर नये सवेरे का आग़ाज होगाचम चमायेगी बस्तीहर सड़कों पर खुला बाज़ार होगाज़रा सा सब्र मेरे मनतेरा भी इन्तज़ाम …

दायरे

अपने अपने दायरे रहना सिख लोज़रा सा क़ायदे मे रहना सिख लोअभी तो क़ुदरत ने सिर्फ़ समझाया हैअपना असली रूप कहा दिखलाया हैमनुष्य को अपना दायरा बताया हैफिर भी …