Author: Hindiindia

मुक्तक

चुप चुप के से मुझे क्यों देखती होमेरे पास आकर बात करने से क्यों शरमाती होजो वादा तुमने किया था, वो तो निभा दोवादे का आंस तोडकर मुझे क्यों …

ग़ज़ल

मेरी पलकों की नगरी में तेरी नजर नहीं मिलीतुझे बहुत ढुँढा तु मगर नहीं मिलीजी करता है तेरे चेहरे का चित्र बनाऊँपर बनाने की रब से हुनर नहीं मिलीबहुत …

शायरी

आसमान से बादल बहुत दूर होता है आसमान को याद कर बादल रोता है कैसे समझाया जाए इस दुनिया के लोगों को? ये दोनों के बीच ऐसा मोहब्बत होता …

मुक्तक

कोई कब तक प्यार करे, कोई कब तक प्यार में मरे संभाल के रखो इश्क की चादर ना कोई आग में जले पुकारता हूँ में उसे जीने-मरने की कश्मकश में मुझे मालूम है फिर भी वह मेरे दिल में मरे कवि: स्मित परमार आणंद गुजरात

गुरु पर मुक्तक

कभी जल्दी आते है, कभी देर से आते है हर बार होती है हमारी मस्ती वह आ जाते है यह है गुरु नामक दीपक जिसे शिष्य को मिलता पाठ कभी तो किताब का पाठ तो कभी बहार का पाठ समझाते है कवि: स्मित परमार आणंद गुजरात