Author: drakr

“मौसम का बदलाव एवं कोरोना से बचाव”

अभी छुटा तक था नहीं,होली का जो रँग।व्याप्त खुमारी थी अभी,चढ़ी जिन्हें थी भँग।आँधी-पानी, सँग मेँ,भीषण ओलावृष्टि।लगे,किसी शैतान की,कृषि पर पड़ी कुदृष्टि।जीव-जन्तु व्याकुल हुए,व्यथित सकल ही सृष्टि।सर्दी मेँ भी …

“मौसम का बदलाव और कोरोना से बचाव”

अभी छुटा तक था नहीं,होली का जो रँग।व्याप्त खुमारी थी अभी,चढ़ी जिन्हें थी भँग।आँधी-पानी, सँग मेँ,भीषण ओलावृष्टि।लगे,किसी शैतान की,कृषि पर पड़ी कुदृष्टि।जीव-जन्तु व्याकुल हुए,व्यथित सकल ही सृष्टि।सर्दी मेँ भी …

“मौसम का बदलाव एवं कोरोना से बचाव”

अभी छुटा तक था नहीं,होली का जो रँग।व्याप्त खुमारी थी अभी,चढ़ी जिन्हें थी भँग।आँधी-पानी, सँग मेँ,भीषण ओलावृष्टि।लगे,किसी शैतान की,कृषि पर पड़ी कुदृष्टि।जीव-जन्तु व्याकुल हुए,व्यथित सकल ही सृष्टि।सर्दी मेँ भी …