Author: डी. के. निवातिया

जब से हम कांटो को, गले से लगाने लगे है

  जब से हम कांटो को, गले से लगाने लगे हैलोग फूलो की चुभन से, हमे सताने लगे है !दर्द से रिश्ता कुछ ख़ास-म-खास हुआ हैमर्ज़-ऐ इश्क में खुद सुधार …

माहिया विधा रचना – डी के निवातिया

१.आना मेरे साजन,खुशियों की डोली,लेकर मेरे आँगन !! २.जिस दिन तू आएगा,झूमेगा ये मन,नाचेगा, गाएगा  !! ३.जब मेरी सजे डोली,रात दिवाली कीदिन में होगी होली ।।४.दर्शन को मैं तरसीसावन …

हाइकू मज़दूर- मज़बूर – डी के निवातिया

हाइकू मज़दूर- मज़बूर *** सुदूर गाँवशहर ये बेगानामिले न ठाँव !! प्रवासी चलेनापे ज़मीं आसमांकदमो तलें !! रोज़ी की खोज,पत्थर बने फूल,रुई का बोझ !! गाँव के लोगशहरो पर …

ज़ाम-ऐ-शराब – डी के निवातिया

ज़ाम-ऐ-शराब *** इश्क में हमे न वफ़ा का गुलाब चाहिए,ख़िदमत में न दावत-ऐ-क़बाब चाहिए !हम तो आशिक, मजनूं, दिवाने यार है,उनकी आँखों से ज़ाम-ऐ-शराब चाहिए !! *** स्वरचित – …

माँ – डी के निवातिया

।। माँ ।। मोतियों सा भरा समंदर,लहरों सी उतार-चढ़ाव, माँ, उम्मीदों से भरा शहर जैसे,कोई ठहरी झील सी गाँव, माँ, शुभकामनाओं की लड़ी,आशीषों की बड़ी छाँव, माँ, सूरज माथे …

कोरोना वीरो को प्रणाम – डी० के० निवातिया

कोरोना वीरो को प्रणाम *** कोरोना वीरो का अमिट बलिदान,याद रखेगा बच्चा बच्चा हिंदुस्तान,इनकी मेहनत औ दरियादिली का,गुणगान युगों युगों करेगा ये जहान !! डर अब अंतस में रम …

गुनाहग़ार – डी के निवातिया

गुनाहग़ार!मानता हूँ इस बात के लिए मैं गुनाहग़ार हूँ,तेरे अनमोल दो घडी वक़्त का तलबगार हूँ,कोई असीम दौलत तो नहीं मांगी थी तुझसे,फिर क्यों तेरी नज़रो में हुआ मैं …

नफ़रत – डी के निवातिया

विषय : नफ़रतविद्या : हाइकु*** *** *** शासक मौन,नफ़रत की आगबुझाए कौन।। रोपे हैवान,नफ़रत के बीज,रोये इंसान।। प्रीत की रीतनफ़रत न करदिल को जीत ।। फूलों में पले,फैली जो …

खुराफात हो जाए – डी के निवातिया

खुराफात हो जाए *** शैतानों की भीड़ में अगर इंसान से मुलाक़ात हो जाए,मैं समझू, की मेरी ईश्वर , अल्लाह से बात हो जाए !! झूठों के नगर में …

गुमान – डी के निवातिया  

गुमान! कुछ साथ लाये थे ना साथ ले जाना है,जिस हाल आये थे उस हाल में जाना है,फिर किस बात का गुमान करते हो यारोजिस देह में आये थे, …

शिव – डी के निवातिया

शिव *** सत्य सनातन शिव की शक्ति,सर्व शक्तिमान है,सर्वज्ञानी, स्वयंश्रेष्ठ, सर्वलोचन,सृष्टि का निर्माण है,शिव सर्वस्व, शिव आदि देव,सब शिव की संतान है,सत्यम शिवम् सुंदरम श्लोक,शिव शंकर की पहचान है …

प्यार करेंगें-प्रेम गीत – डी के निवातिया

प्रेम गीत*** *** ***…….प्यार करेंगें…..*** *** *** कसम की कसम तुमको इतना प्यार करेंगें,हर दिन हर पल हम, प्रेम की बौछार करेंगे,यादों में आयेंगें, कभी हम ख्वाबो में आयेंगे,शरारत …

चना-आलेख-डी के निवातिया

*चना* ‘चना’ अपने नाम के जैसे भी खुद भी छोटा सा ही है, हाँ है तो छोटा ही मगर अपने गुण, प्रकृति, स्वभाव व आचरण से उतना ही विशाल …

वक़्त की चाल – डी के निवातिया

वक़्त की चाल *** जो आज वफ़ा की दुहाई देते है, कौन जाने ये कब बेवफा हो जाएंगे !जो आज बेवफा है चोला बदलकर, वफादार के भेष में नजर …

बीत गए सो बीत गए – डी के निवातिया

बीत गए सो बीत गए *** दिन महीने साल बीत गए सो बीत गए,कुछ पलों से हारे, हम, कुछ से जीत गए, वक़्त की धारा में, बहती जाए जीवन …

हद से गुजरते है – D.K. निवातिया

हद से गुजरते है *** जीने की चाहत में हद से गुजरते हैमौत की आहट में जद से गुज़रते हैहर दिन एक नया शगूफ़ा राह अटकें,नेक से लेने बदला …

पूजा – हाइकू – डी के निवातिया

विषय : पूजाविधा : हाइकू******** १)स्वर्ग की प्राप्तिमात पिता की पूजा !आत्मीय तृप्ति !! २)कर्म ही पूजा,सत्य भाग्य विधाता,पथ न दूजा !! ३)पूजा का नाता,गुरु, मात-पिता से,यही विधाता !! …

वादा – हाइकू – डी के निवातिया

विषय : वादाविधा : हाइकू***********१)याद है वादा,बाटेंगे सुख दुःखजो आधा आधा !! २)तेरा इरादा,नफरत मिटाना,था झूठा वादा !! ३)एक वादे पे,कुर्बान ये जहान,दोस्ती महान !! ४)वादा टूटे ना,निभाना ऐसे …

दोहे- मनुष जात – डी के निवातिया

मनुष जात से पशु भला, करे न खुद से घात ।मिथ्या नाता छल कपट, सखा न जाने तात ।। मानव जन सबसे बड़े, दुनिया में शैतानजन्म लिया जिस पेट …

औक़ात – डी के निवातिया

औकात ! कोई कितना भी रसूखदार क्यों न हो कोई कितना भी मालदार क्यों न हो, औक़ात खुद के लिए कफ़न की नहीं, कोई कितना भी दानदार क्यों न …

रुख़सत – डी के निवातिया

रुख़सत ! गुमनाम होकर रुख़सत कर जाऊंगा तेरे शहर से, गर एक बार तू अपने लबों से मेरा नाम पुकार दे !! ! डी के निवातिया Оформить и получить …

बात बड़ी है – डी के निवातिया

बात बड़ी है हिय-उपवन में, लालसा के अंकुर फूटे, मंत्रमुग्ध हो, गौरैया सी चहचाने लगी, क्षितिज की शाख पर, क्रंदन करती, फुदकती, नवजीवन के सपने संजोती, सप्तरंगी सपनो में …

*दीपावली*

दीपमाला की रौशनी से आँगन जगमगायेंगे, खुशियों की फुलझड़ियों से दिल मुस्कुरायेंगें, अम्बर ओढ़ेगा झिलमिल सितारों की चुनर, धरा पर लक्ष्मी-गणेश, राम जी उतर आयेंगे !! सुख-समृद्धि के प्रतीक …

रिश्तें – डी के निवातिया !!

  रिश्ते पुष्पों से महकते है कभी, कांटो से चुभते है, सरिता से बहते है, कभी, सागर से ठहरते है, बादल से बरसते है, कभी, बिजली से गरजते है, …

प्रेम – डी के निवातिया

प्रेम कविता जिसका प्रदर्शन हो,वो प्रेम नहीं, नयनों से दर्शन हो, वो प्रेम नहीं !!!जो हम-तुम करते है,प्रेम वो नही,जो मन मे विचरते है, प्रेम वो नही !!!कलम के …