Author: डी. के. निवातिया

सावन की बारिश – डी के निवातिया

सावन की बारिश ने मुझे सताया बहुत है, तेरी यादो ने अबकी दिल दुखाया बहुत है, वैसे तो पहले भी कई दफ़ा तन्हा रहे, मगर इस बार मुहब्बत ने …

बिन भाई की बहन राखी गीत – डी के निवातिया 

बिन भाई की बहन राखी गीत भाई नहीं है जिसका उससे राखी कौन बंधाये बिन भाई की जो बहना हो कैसे फर्ज निभाये, अगर नहीं है भाई मेरा, उसमे …

रक्षा बंधन – डी के निवातिया

रक्षा बंधन सिर्फ भाई बहन का ही नहीं, सभी से प्रेम का त्यौहार है रक्षा बंधन, जो भी परवाह करे तुम्हारी, उनके मान सम्मान का पर्व है रक्षा बंधन, …

मगर से बैर – डी के निवातिया

दूसरों की मुखालफत में दिन रात रहता है, आग का दरिया बनकर पानी संग बहता है समझो कितना शातिर होगा वो शख्स, जो पानी में रहकर मगर से बैर …

हाइकु : डी के निवातिया

हाइकु *** ऊँघती धरा, भरे जो अंगड़ाई, क्रूर क्रंदन !! रात दुल्हिन, सितारों की चादर ओढ़ के सोये !! चाँद कुँवारा, छत पर निहारे, रात की रानी !! खेत …

शरारत कमाल करती है -डी के निवातिया

आँखों की शरारत, होठो की लाली, कमाल करती है, चाँद से चेहरे से बरसती खूबसूरती बवाल करती है !! कातिल जवानी, लुभाती अदाओं से छलकाती शराब, कम्बख्त मासूम सी …

कब समझेगा – डी के निवातिया

कब समझेगा वक़्त बता रहा है तुझको तेरी खामियां, पहचान ले अब तो अपनी नाकामिया, अब नहीं समझा तो क्या तब समझेगा, जब मिट जायेंगी जहां से तेरी निशानियां …

मंजर – डी के निवातिया

मंजर *** महामारी का ऐसा खंजर न देखा था हमने कभी इंसानी दिल इतना बंजर न देखा था हमने कभी, धरती रो रही है देखकर आज आसमान रो रहा …

निशानियां – डी के निवातिया

निशानियां *** वक़्त बता रहा है तुझको तेरी खामियां, पहचान ले अब तो अपनी नाकामिया, अब नहीं समझा तो क्या तब समझेगा, जब मिट जायेंगी तेरी सभी निशानियां !! …

नाम कर देंगे – डी के निवातिया

नाम कर देंगे *** याद रखेगा जमाना ऐसा काम कर देंगे ये जिन्दगी अपनी तुम्हारे नाम कर देंगे हम जियेंगे और मरेंगे बस इक तेरे लिए ऐलान इस बात …

ईद मुबारक – डी के निवातिया

ईद मुबारक ईद के चांद से गुज़ारिश इतनी है, ये फ़िजा गुल ऐ गुलज़ार हो जाये !! दुआओं में मांगा हो जिन्हें आपने, सुबह सवेरे उनका दीदार हो जाये …

जुदा हो जाऊँगा – डी के निवातिया

जुदा हो जाऊँगा *** कोई रोकना चाहेगा लाख फिर भी जुदा हो जाऊँगा लगाकर गले मौत को,  जिंदगी से ख़फ़ा हो जाऊँगा !! चाहकर भी कुछ न कर पायेगा …

औकात दिखा दी – डी के निवातिया

औकात दिखा दी *** इक बीमारी ने इंसानों को उनकी औकात दिखा दी, इंसान के भेष में छुपे हुए हैवानों की जात दिखा दी ! कोई रोता अपनो को …

रोना याद आया – डी के निवातिया

रोना याद आया *** रोते हुए देखा पड़ोसी को तो रोना याद आया, जब भूख लगी, तब फ़सल बोना याद आया ! सोया था पैर पसार कर, बड़े ही …

तेरी भी खता है – डी के निवातिया

तेरी भी खता है *** ख़ुदा की रज़ा क्या है ये किसे पता है, किसी और को दोष देना बड़ी धता है! जो भी हुआ है सबक ले कुछ …

सुरूर अच्छा नहीं होता – डी के निवातिया

सुरूर अच्छा नहीं होता *** हुस्न पर शबाब का सुरूर अच्छा नहीं होता, खूबसूरती पर करना गुरुर अच्छा नहीं होता, पानी के बुलबुले की तरह होती है ये जिंदगी, …

वक़्त ही तो है गुजर जाएगा – डी के निवातिया

वक़्त ही तो है गुजर जाएगा *** आज बुरा है, कल अच्छा होगा आज अकेला, कल गुच्छा होगा बदलती है हर पल उसकी लीला, कब कसे डोर, कब कर …

जड़ चेतन – डी के निवातिया

जड़ चेतन *** मैं तो जड़ हूँ पर तुम तो चेतन हो, सँवार लो तुम, दे परिचय प्रबुद्धता का, तराश लो मुझे, अपने मन माफिक, कायम कर दो, गूढ़ता …

वो प्रेम नहीं – डी के निवातिया

कविता जिसका प्रदर्शन हो, वो प्रेम नहीं, नयनों से दर्शन हो, वो प्रेम नहीं !! ! जो हम-तुम करते है, प्रेम वो नही, जो मन मे विचरते है, प्रेम …

कब समझोगे – डी के निवातिया

अभी नहीं तो कब समझोगे, आज नहीं तो कल समझोगे, शाशक  शेर  भूखा गुर्राता है, खा जाएगा जब  समझोगे !! *** डी के निवातिया

हमदर्द ढूंढते हो – डी के निवातिया

हमदर्द ढूंढते हो, दर्द के साये में रहते हो, और हमदर्द ढूंढते हो, बड़े नादाँ मरीज़ हो, खुद-ब-खुद मर्ज़ ढूंढते हो !! खुदगर्ज़ी की जीती जागती मिसाल हो आप, …

बसंत आने को है – डी के निवातिया

बसंत आने को है *** दीपशिखा के चंचल चरण करने चले है फागुन वरण शीतल ज्वाला  से अपनी सौरभ मधु बरसाने को है सुना है ! बसंत आने को …

इश्क रूहानी – डी के निवातिया

इश्क रूहानी *** शाम सुहानी हो तो कुछ और बात हो, साज रूमानी हो तो कुछ और बात हो, यूँ तो दीवाने हजार मिलते है हुस्न के, इश्क रूहानी …

नूतन पल – डी के निवातिया

नूतन पल नूतन पल, बेला नई, नवल किरण की भोर ! आशा दीपक जल उठे, तन मन हुआ विभोर !! तन मन हुआ विभोर, नयन कँवल विहग जागे ! …

नया साल – डी के निवातिया

नया साल नए साल के जश्न में, बात नहीं वो शेष ! बीमारी से आज तक, जूझ रहा है देश !! जूझ रहा है देश, चिंता बहुत यह भारी …