Author: Dhirendraemail

क्या करोगी तुम, मेरी ज़िन्दगी में आके ?

क्या करोगे तुम, मेरी मह्फ़िल में आकेहम तो तनहा ही थे, जब से तुम छोड़ गए!मरा नहीं जीता रहा, उन चंद लम्हों को याद करकेजो तुम मेरे नाम कर …