Author: Dhirendra

अनमोल बचपन – धीरेन्द्र

अनमोल बचपनअकरम चकरम बुम, सुन बच्चों की धुननन्ही सी इक जान के पीछे क्यू पड़े हो तुम -२दिल्ली की दिवार से सट के पानीपूरी खायेंगेअपनी इस दावत में हम …

बाल श्रम विभीषिका – धीरेन्द्र

बाल श्रम विभीषिकाबच्चे हैं हम, बच्चों पर तो यू बोझ न रक्खो, रहम करोजी लें, बढ़ लें, खेलें, पढ़ लें, कृपया कर ऐसा ,जतन करो |मासूम लकीरें हाथों की, …