Author: Danish Mirza

देखो मातम है वहां

देखो मातम है वहां,उस सुनसान गली में,कोई रोने वाला नज़र नहीं आता,लोग कहता है बस्ती है वहाँ,इन झूठे इशारों का सफ़र,जिसकी मंजिल का निशाँ भी नहीं है वहाँ,संसार की …

वक़्त कैसे बदलोगे

वक़्त कैसे बदलोगे वो असामन पर उड़ने वालो की बात करते है, हमारे लहज़े पर सवाल करते है. अंदाज़ उनका आज के ज़माने का है, हम वही पुराने ख्यालात …