Author: अशोक धर

चित्र में माँ

माँ के उरोज़ों के बीच बहती-लहराती नदी में डूबता-उतराता रहता था बचपन में आज मैं साठ की दहलीज पर हूँ कई तीखी-गहरी, मदमाती-उफनती नदियाँ देख चुका हूँ कई नद, …