Author: Bindeshwar prasad sharma

दोहे – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – (बिन्दु)

दोहे आई देखो दामिनी, चंदा लेकर साथ दिनकर भी मद्धिम पड़ा, अद्भुत है सौगात। नखत भी अब चमक रहा, जगमग है आकाश घूंघट के पट खोलकर, करता है अट्टहास। …

दोहे – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – (बिन्दु)

दोहे आई देखो दामिनी, चंदा लेकर साथ दिनकर भी मद्धिम पड़ा, अद्भुत है सौगात। नखत भी अब चमक रहा, जगमग है आकाश घूंघट के पट खोलकर, करता है अट्टहास। …

मुक्तक, दौहे और रचनाएं – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – (बिन्दु)

मुक्तक जिसे हंसना था, तूने रुला दिया खुशियाँ दे न सके गम में सुला दिया। उजाड़ दी ज़िन्दगी भला चंगा था इक पल में अपना रिश्ता भुला दिया। नफ़रत …

विष्णुछंद – गीत – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – (बिन्दु)

धीरे-धीरे विष्णुपद छंद – 16+10 अंत 2 दौड़ेगा तो थक जायेगा, धीरे – धीरे चल चलना ही तो जीवन है यह, दीपों सा तू जल। ठोकर भी गर लगे …

सार छंद – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – (बिन्दु)

पत्थर पर भी दूभ उगेगा सार छंद – 16+१२ अंत 22 बहुत आगे बढ़ गई दुनिया, तुम देखो हम कितने तुम भी आगे बढ़ सकते हो, रोका तुमको किसने। …

रचनाएं – (२५) बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – (बिन्दु)

दोकानहम न जननी ई पपिया, हैरान कइले बाहमरे घरवा के आगे, दोकान कइले बा।हम न जननी कि अतना, ई पागल करीहमरे दिलवा के ऐसे, ई घायल करी।अब अखिया के …

रचनाएं – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – (बिन्दु)

मनुष्य मनुष्य तामसी क्यों हो गयालालची, स्वार्थी हो गया।मनु का ये सुपुत्र भी होकरकैसे वह नार्थी हो गया।।हकीकत को जानता नहींसत्म को भी समझता नही।कौन इंसान कौन हैवानधर्म को …

रचनाएं – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – (बिन्दु)

वर्ण पिरामिड येबेटीवो बेटामाया जालदुनियादारीरिश्ते और नातेकुदरत की खेल।मैंहमहमारादाव – पेचधन दौलतसब यहीं का हैयहीं पर रहेगा।येरिश्तेचाहतनफ़रतमन का फेरकर्म – धर्म – मर्मकौन यहाँ समझा।येधराआकाशजल – अग्निवायु से बनानिर्जीव …

रचनाएं – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – (बिन्दु)

होरीखेलत फाग उमंग लिए मनझूमत तन ठहरी – ठहरीगाल गुलाबी रंग दिए तबडोलत सब गौंआ नगरी।ब्रज की नगरी धूम मचो हैमन मोहन खेलै होरीराधा भागी दौडी – दौड़ीश्यामा करै …

कोरोना – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – (बिन्दु)

कोरोनान हाथ मिलाओ न गले लगाओकोरोना को अब दूर भगाओ।संक्रमित एक रोग है ऐसालगे तो गहरे सोग के जैसा।दुखों की घड़ी आई हम सब परउसको हम दूर करें सब …

हमारी सरकार – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

हमारी सरकार क्या करेगी पैंतिस वर्ष पूर्व का लिखा अपना एक अनुभव आप सबों के सामने पटल पर रख रहा हूँ, जिसे मैंनें लिपिबद्ध किया है।राष्ट्र के नजर में …

कहानियाँ – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

Bindeshwar Prasad Sharma: विक्की की बहादुरीबच्चों की जिंदगी भी अजीब है । उनके अलग – अलग स्वभाव उन्हें अलग अलग क्षेत्रों में ले जाता है। जो पसंद आ …

कहानियाँ – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

Bindeshwar Prasad Sharma: प्रेयसीसाधु बाबा ताजी हवा खाने कुटी से बाहर निकले थे। अनायास गंगा किनारे रेत पर उन्हें एक सांप दिखाई दिया। उसे देखते ही साधु बाबा …

कहानियाँ – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

मूर्तिकारपंद्रह वर्ष का बालक हेमंत अब एक नामी – गरामी कलाकार बन गया था। मूर्ति कला में माहिर होने के साथ-साथ वह चित्र कला और संगीत कला में भी …

रचनाएँ – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

Bindeshwar Prasad Sharma: सरस्वती वंदनामैं अपने प्रतिज्ञान से माता, अवगत तुझे कराता हूँहो समर्पित चरणों में तेरा, अपना शीश झुकाता हूँ।हे महाश्वेता, हंसासना, चित्रगन्धा, तू नैना – भिरामतू …

मन की आँखें – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

ग़ज़लअपनी रज़ा में जीना दुश्वार लगता हैगिरेबान में झाँको तो बुखार लगता है।बड़ी दुष्कर है जिंदगी यकीं होता नहींफरेब इतना कि सब कुछ बेकार लगता है।जिधर भी हैं जाते …

दर्पन – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

जीवन दर्पनपरिंदों को छू लेने दो आकाशउन्हें हौसलों में जी लेने दोफतह कर लेने दोउन्हें उनकी अपनी मंजिल।पहुँच जानें दो चरम तकगतांक के आगे क्या हैसमझ लेने दो उन्हें।पंख …

फूल – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

फूल चमन कादिल से दिल को मिलाते चलोफूल चमन के खिलाते चलो।मत करना शरारत किसी सेमत करना शिकायत किसी से।अब ना सोचो कि जाए कहाँचल दिए हम हैं मंजिल …

गीत – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

गीत दिल खोल कर दिखाएं कैसेकुछ कह कर समझाएं कैसे।ऐसे – कैसे हम बतलाएंकहाँ – कहाँ पर ऐसे जाएं।मीठी बातों में बहलाकेअपनापन भी खूब दिखाएं।।इनका पता लगाएं कैसेकुछ कह …

ग़ज़ल – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

ग़ज़लथोड़ा सा हंँसा कर, रूला दिया हमेंमुहब्बत किस काम की, भुला दिया हमें।अभी खुमार चढ़ा ही था, इन आँखों परअक़ीदा – ए- इश्क ने सुला दिया हमें।अब न होश …

प्यार के घरौंदे – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

प्यार के घरौंदे दिल की गहराई में उतर गये हैं हमअपनी तन्हाई से गुजर गये हैं हम। प्यार को प्यार से ही उसको समझा थाप्यार से प्यार में ही …

देखा है बचपन हमने – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

देखा है बचपन हमने कितना सुंदर कितना सुरभित,देखा चंदन वन हमनेसुंदर अनुपम निर्मल निर्भित, देखा है बचपन हमने। अब तो आया पैसों का युग, प्यार कहाँ से आयेगाक्षण भर …

बाबा तेरे चौखट पर – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

बाबा तेरे चौखट पर बाबा तेरे चौखट पर, हाजिरी लगाने आए हैंकब तक मुझसे रूठोगे, हम तुझे मनाने आए हैं। हर दिन मनाने आऊँगा,हर इक पल तुझे रिझाऊँगाजो भी …

अंगड़ाई – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

अंगड़ाई कल – कल करती बहती नदियां चलती सनन – सनन पुरवाई । झूम – झूम के हवा वसंतीलेती है खूब अंगड़ाई। वन-उपवन सब हरा भरा हैहंस रही देखो …

साथ रहने दो – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

हाथ को हाथ रहने दोअभी तो साथ रहने दो।क्या होगा किसने देखाये मुलाकात रहने दो। नहीं ठीक गुमान रखना जुल्म ये घात रहने दो।सुकून – चैन मिले हमको मेरी …