Author: bhupendradave

वो झोपड़ी में खाँसता था झोपड़ी हिलती थी

वो झोपड़ी में खाँसता था झोपड़ी हिलती थीफुटपाथ पर वही आ गया तो धरती हिलती थी।मेरा नाम आया तो उनकी जुबाँ कँपती थीजाम कँपते थे, सुराही में मैकशी हिलती …

पिला ऐसी कि हर पैमाना मैखाना लगे

पिला ऐसी कि हर पैमाना मैखाना लगेपिला इतनी कि मैखाना इक पैमाना लगे।बैठ तेरे आगोश में ताउम्र ऐ साकीजिन्दगी हर सूरत अक्स-ए-मैखाना1 लगे।वक्त अब क्यूँ इस तरह खुद-इंतशारी2 का …

शहीद की माँ

शहीद की माँबेटा,बचपन तेरा भोलेपन मेंजाने क्या क्या करता थापलने पर बस लेटे लेटेहँसता था, मुस्काता था।घुटने के बल चलते चलतेकुछ रुकता फिर बढ़ता थामाँ का आँचल दिख जाने …

अपनी दफ्न जिन्दगी बस तलाशता रहा

अपनी दफ्न जिन्दगी बस तलाशता रहारात भर वह कब्र सारी खँगालता रहा।पहले सभी यादें चुन चुन जलाता रहाफिर यादों की राख बैठा झुलसता रहा।आँधी में बेपर जिन्दगी ले उड़ता …

इस आँधी को मेरा आखरी सलाम भेज दे

इस आँधी को मेरा आखरी सलाम भेज देमेरी किस्मत की कतरनें भी तमाम भेज दे।ए डूबते सूरज, बस इक मेहरबानी कर जाअपनी तपस बटोरकर सुलगती शाम भेज दे।ना पानी …

आज तेरे मैकदे में साकी, सुराही नहीं दिखती

आज तेरे मैकदे में साकी, सुराही नहीं दिखतीकहीं चिन्गारी नहीं दिखती, कहीं जिन्दगी नहीं दिखती।हरइक आवाज ऊँची थी, दूर तक गूँजती गई थीइस सन्नाटे के आगोश में खामोशी नहीं …

अभी पलकों में हसीन सपने सजने दो

अभी पलकों में हसीन सपने सजने दोकभी आगे इन्हें हकीकत भी बनने दो।तमाम रात मैकदों को खुला रहने दोतमाम उम्र यूँ ही बस मदहोश रहने दो।ये बहार आके चली …

प्रकृति-प्रणय गीत

प्रकृति-प्रणय गीतसंध्या की स्वर्णिम किरणों सेआलिंगनों का ले उपहारसजी सँवारी संध्या-सी तबकरती प्रकृति सोलह श्रंगार।पश्चिम की लाली में बिंधकरशर्माती सकुचाती जातीक्षितिज पार झुरमुट के पीछेदुल्हन-सी वह लुक छिप जाती।खगवृन्दों …

मैं जीवन के दुर्लभ दर्पण में

मैं जीवन के दुर्लभ दर्पण मेंढूँढ़ रहा हूँ तेरी छवि सुन्दरप्रकृति की भी पावन परछाई मेंखोज रहा हूँ कृति-चिन्ह निरंतर। किस किसको खोजूँ, किसको पाऊँक्षीण-शक्ति-स्त्रोत युक्त जीवन मेंढूँढ़ रहा हूँ …

मेरे गीतों के शब्दों में श्रंगार सजा दो

मेरे गीतों के शब्दों में श्रंगार सजा दोतुम शब्दों में अर्थ जगाकर संस्कार जगा दो।शब्दों की झंकार तुम्हीं होप्राणों की हुँकार तुम्हीं होश्रद्धा का विस्तार तुम्हीं होकरुणा की पुकार …

यूँ ही तुम चुप रहते हो बात करो तो अच्छा लगे

यूँ ही तुम चुप रहते हो बात करो तो अच्छा लगेमंदिर से बाहर आकर साथ चलो तो अच्छा लगे।पत्थर की मूरत हो तराशी मुस्कान से सजे होअसली मुस्कानों से …

मानव कुल कितना जीता है

मानव कुल कितना जीता हैकुछ पल कुछ क्षण जीता है।मरने के पहले किश्तों मेंमरते मरते ही जीता है। जन्म समय हर शिशु रोता हैफिर हँसता है, मुस्काता हैआगे चिन्ता लिये …

बिखरी साँसें कहती जाती

बिखरी साँसें कहती जातीहर पल को बस खुश रहने दो।अधरों को मुस्कानों से कुछबिखरे मोती चुन लेने दो।पीड़ा के पलने से उठकरकुछ कदम जगत में चलने दोगिरकर उठने का …

तुमने अपनी दुनिया सजा रखी है

तुमने अपनी दुनिया सजा रखी हैतुमने अपनी दुनिया सजा रखी हैभ्रमरों की मस्त महफिल बुला रखी हैपर तुमने मुझे तन्हा रहने न दियाकुछ याद अपनी मेरे लिये सजा रखी …

चाँद सितारों से रात सजा रखी है

चाँद सितारों से रात सजा रखी हैचाँद सितारों से रात सजा रखी हैजमीं पे मखमली दूब सजा रखी है।बता, ये दुनिया क्यूँकर सजा रखी हैवो बोला, तेरे लिये सजा …

ऐ खुदा मुझे दवा और दुआ कुछ न दे

ऐ खुदा मुझे दवा और दुआ कुछ न देदे सके तो अपनी मुस्कान की कतरन दे।इक बहाना चाहिये था मंदिर आने काशुक्र है तूने दर्द दिया दवा अब न …

मुझे देखकर तुम (युगल गीत)   … भूपेन्द्र कुमार दवे

मुझे देखकर तुम (युगल गीत) गायक“मुझे देखकर तुम मुस्कराती दिखी होमोहब्बत के गजरे सजाती मिली हो।“गायिका“मुझे देखकर तुम मुस्कराते दिखे होशरारत के जल्वे दिखाते मिले हो।“गायक“मुझे देखकर तुम मुस्कराती दिखी …

सपनों की महक

सपनों की महक फूल  की गंध कभी भटकती नहीं हैसपनों की महक कभी दबती नहीं है। नींद करवटें चाहे बदला करेअचेतन हो नयन भी सोया करे।स्वच्छ चंचल चाँदनी-सी रात मेंमायूस मन …

कदम दो कदम इक साथ चलो तो बेहतर है

कदम दो कदम इक साथ चलो तो बेहतर हैमधुर मीठी बातें भी करो तो बेहतर है। खोजने सकून चले हो अँधरी बस्ती मेंचिराग जलाकर साथ रखो तो बेहतर है। पहले कभी …

पीड़ा के पलने पर पलता … भूपेन्द्र कुमार दवे

पीड़ा के पलने पर पलताप्यार नहीं था पछताता।आँसू भी आँखों में आकरनहीं सिसकने अकुलाता। मुस्कानें मुस्काती दिखतीजब मिलती थीं मुस्कानों सेयादों की झुरमुट में छिपकरमिलते थे प्रियजन अपनों से। पर पलकों …

मेरे गीत नीलाम हो गये —- भूपेन्द्र कुमार दवे

मेरे गीत नीलाम हो गयेअमोल बोल बदनाम हो गयेदुल्हन-सी कुँवारी लय थीसुमधुर वह श्रंगार किये थीसजी सजायी शब्द पालकीभावी सुख का संसार लिये थीअर्थ भाव थे, समधी सुर थेपल …

गाओ फिर गीत वही …. भूपेन्द्र कुमार दवे

गाओ फिर गीत वहीगाओ फिर गीत वही जो उस दिन गाया थामेघों की पलकों जो भादों भर लाया थामेरे मन को बहलाने कीघावों को भी झुटलाने कीछन्दों से मत …

उन गीतों को तुम सुर तो दे दो …. भूपेन्द्र कुमार दवे

उन गीतों को तुम सुर तो दे दो  जो रुँधे कंठ में मूक पड़े होंउन गीतों को तुम सुर तो दे दो। जो उलझे वीणा तारों मेंगुमसुम गुमसुम सिसक रहे होंजो …

सन्नाटे में छिप जाती है … भूपेन्द्र कुमार दवे

 सन्नाटे में छिप जाती हैहर पीड़ा की आवाज कहीं।इसको सुनने जो कतरातेउनको होती है लाज नहीं। इस कारण जब ठोकर खायीइस पीड़ा ने तब उफ् न कियापथ के पत्थर चूम …

मेरे गीतों का परिचय —- भूपेंद्र कुमार दवे

मेरे गीतों का परिचयबहते आँसू देते हैंपलकों को उपहार स्वयंसहमे आँसू देते हैं गीले गीले मोती दुख केपीड़ा की जब माला बनतेगीतों में गूंथने के पहलेपल में बनते, पल में …