Author: bholashankar

लोग हसँतें हैं हमपर

लाेग हंसते हैै हमपर हमारा आशियाना ना देखकर आशियाना तो मै भी बना लेता गर दीवारें बेवफा ना होती लोग हसँते हैै हमपर हमें मझधार में देखकर साहिल तो …

उदार बनो

एक अकेला न रहो, संसार बनो कट्टरवाद छोड़ मेरे भाई उदार बनो किसके स्वार्थ पे सब न्योछावर पाप करा रहे पुण्य बताकर सही गलत से किसका नाता क्लेश द्वेष …