Author: Bhawana Kumari

कैसा बाल दिवस -Bhawana Kumari

जरा बताना चाचा नेहरू, ये कैसा बाल दिवस है, क्यों इनके चेहरे मुरझाये है, क्यों इनके आँखों में ख्व़ाब नहीं, क्यों इनके हाथों में किताब नहीं, क्यों ये दर …

जो कहना है मुझसे कहो-Bhawana Kumari

अच्छा या बुरा,सही या गलत जो कहना है मुझसे कहो ।क्यो दुनिया के सामने,मेरा मज़ाक बना रहे हो ।किसी से कुछ कहने का क्या फायदा,सुधरना मुझको है उसको नहीं …

किस्मत का खेल–Bhawana Kumari

किस्मत का खेल बड़ा ही निराला है,किसी ने जरुरत से ज्यादा पाया है ।किसी ने सुखी रोटी में भी काम चलाया है,कोई करोड़ो रुपये कमा कर भी,किस्मत का रोना …

चाँद तुझसे एक शिकायत है–Bhawana Kumari

ऐ चाँद तुझसे एक शिकायत है,तू मुझसे इतनी दूर क्यों रहता है ।कभी तो मेरे भी घर आया कर,मेरे पास बैठ कर मुझसे बात किया कर ।मुझे अपने आगोश …

कैसे दूँ मुबारकबाद- Bhawana kumari

कैसे खेलूँ होली इस बार रंगो की,जब सरहद पर खेली जा रही होली खूनों की।कैसे रंग लूँ गाल इस बार अबीर-गुलाल से,जब नहीं बुझी है आग हमारे सीने की …

हमेशा की तरह-Bhawana kumari

मैंने आज भी,तुम्हारा इन्तज़ार किया,हमेशा की तरह,कि तुम जरुर आओगे ।तुमने जो वादा किया था मुझसेवो वादा जरुर निभाओगे,पर तुमने तोड़ दिया आज भी,अपना वादा हमेशा की तरह ।भावना …

अभी टूटा नहीं है ख्व़ाब मेरा-Bhawana kumari

तुमने बहुत कोशिश की थी मेरे ख्व़ाबो को तोड़ने की,पर जान लो मैंने टूटने नहीं दिये है अभी तक ख्व़ाब अपना जिंदा है वो अब भी मेरे आँखों में …

जय माँ सरस्वती Bhawana kumari

हे माँ सरस्वती,मेरे जीवन से अन्धकार हटाकर ,मुझे ज्ञान का भंडार दे ।करती हूँ मैं तेरी पूजा अर्चना,मेरी लेखनी को और निखारा दे।लिख सँकू मैं भी एक कविता,तेरे नाम …

व्यर्थ ना जाने देगे कुर्बानी-Bhawana kumari

आज कोई शब्द नहीं,कोई भाव नहीं,ना चल रही क़लम मेरी आज,नि:शब्द हो मेरी कलम आज,बस इतना ही लिख रही हर बार लेखनी आज,ना भूल पाऐगे वीरो की कुर्बानी ।ऐ …

पुरुष जीवन-Bhawana kumari

नारी जीवन है कठिन तो,पुरुष जीवन भी आसान नहीं।रोजी-रोटी के जुगाड़ में,दिन -रात भटकते रहते है ।कभी किसी से कुछ ना कहते,अंदर ही अंदर घुटते रहते है ।माँ-बाप परिवार …