Author: भावना कुमारी

नारी -BHAWANA KUMARI

जाऊँ मैं जिस भी क्षेत्र में अव्वल आ कर दिखलाऊँगी। तुमसे बिलकुल अलग हूँ मैं कुछ कर इस दुनिया से जाऊँगी। नहीं चाहिए तेरा नाम मुझे मैं खुद के …

चन्दा मामा(बाल कविता )- Bhawana Kumari

चन्दा मामा छत पर आना अपने संग चाँदनी लाना। जम कर दूध मलाई खाना बादल में जा कर छुप जाना। चंदा मामा छत पर आना साथ हमारे दौड़ लगाना …

कैसा बाल दिवस -Bhawana Kumari

जरा बताना चाचा नेहरू, ये कैसा बाल दिवस है, क्यों इनके चेहरे मुरझाये है, क्यों इनके आँखों में ख्व़ाब नहीं, क्यों इनके हाथों में किताब नहीं, क्यों ये दर …

जो कहना है मुझसे कहो-Bhawana Kumari

अच्छा या बुरा,सही या गलत जो कहना है मुझसे कहो ।क्यो दुनिया के सामने,मेरा मज़ाक बना रहे हो ।किसी से कुछ कहने का क्या फायदा,सुधरना मुझको है उसको नहीं …

किस्मत का खेल–Bhawana Kumari

किस्मत का खेल बड़ा ही निराला है,किसी ने जरुरत से ज्यादा पाया है ।किसी ने सुखी रोटी में भी काम चलाया है,कोई करोड़ो रुपये कमा कर भी,किस्मत का रोना …

चाँद तुझसे एक शिकायत है–Bhawana Kumari

ऐ चाँद तुझसे एक शिकायत है,तू मुझसे इतनी दूर क्यों रहता है ।कभी तो मेरे भी घर आया कर,मेरे पास बैठ कर मुझसे बात किया कर ।मुझे अपने आगोश …

परछाई -Bhawana Kumari

बनकर मेरी ही परछाई तुम मेरे साथ चलती हो,जब चलती हूँ सुनसान रास्तों पर तुम मेरे साथ होती हो ।मेरे जैसी ही हंसती हो मेरे जैसे ही रोती हो,जैस …

कैसे दूँ मुबारकबाद- Bhawana kumari

कैसे खेलूँ होली इस बार रंगो की,जब सरहद पर खेली जा रही होली खूनों की।कैसे रंग लूँ गाल इस बार अबीर-गुलाल से,जब नहीं बुझी है आग हमारे सीने की …

हमेशा की तरह-Bhawana kumari

मैंने आज भी,तुम्हारा इन्तज़ार किया,हमेशा की तरह,कि तुम जरुर आओगे ।तुमने जो वादा किया था मुझसेवो वादा जरुर निभाओगे,पर तुमने तोड़ दिया आज भी,अपना वादा हमेशा की तरह ।भावना …

अभी टूटा नहीं है ख्व़ाब मेरा-Bhawana kumari

तुमने बहुत कोशिश की थी मेरे ख्व़ाबो को तोड़ने की,पर जान लो मैंने टूटने नहीं दिये है अभी तक ख्व़ाब अपना जिंदा है वो अब भी मेरे आँखों में …

फागुन की फगुनाहट — Bhawana Kumari

फागुन में जब फगुनाहट की हवा चलती है,तब जीजा जी को शाली की याद आती है ।बेचारे जीजा जी क्या करे जब बीबी और शाली,दोनो ही उस पर भारी …

जय माँ सरस्वती Bhawana kumari

हे माँ सरस्वती,मेरे जीवन से अन्धकार हटाकर ,मुझे ज्ञान का भंडार दे ।करती हूँ मैं तेरी पूजा अर्चना,मेरी लेखनी को और निखारा दे।लिख सँकू मैं भी एक कविता,तेरे नाम …

व्यर्थ ना जाने देगे कुर्बानी-Bhawana kumari

आज कोई शब्द नहीं,कोई भाव नहीं,ना चल रही क़लम मेरी आज,नि:शब्द हो मेरी कलम आज,बस इतना ही लिख रही हर बार लेखनी आज,ना भूल पाऐगे वीरो की कुर्बानी ।ऐ …