Author: आलोक पाण्डेय

शत्रु का करना है संहार !

शत्रु का करना है संहार !__________हे भारत के कर्णधार !नवनीत ! सुंदर ! हे सुकुमार !आज देख देश, कर तनिक विचार,क्या नहीं विलुप्त सभ्य संस्कृति-संस्कार !विभिन्न दस्युओं म्लेच्छों पर, …

श्री राम की प्रतिक्षा

राम की प्रतिक्षा#राम_की_प्रतिक्षा_________देवत्व व असुरत्व के इस द्वंद, वैमनस्य व अंतर्विरोध के बीच प्रकृति, अपने अधिष्ठान पुरुषोत्तम के प्रतिष्ठित अवतरण की पृष्ठभूमि रच रही है। बहुत दिनों बाद संभवतः …

बन्धुवर अब तो आ जा गांव !

बन्धुवर अब तो आ जा गांव !कवि आलोक पाण्डेय बन्धुवर अब तो आ जा गांव ! खोद रहे नित रेत माफिया नदिया की सब रेतीचर डाले हरियाली सारी धरती …

‘काल’ व्यूह से लड़ना होगा !

काल व्यूह से लड़ना होगा !____________यह पुण्य भूमि है ऋषियों की,जहां अभूतपूर्व वीरता त्याग की धारखंडित भारत आज खंड खंड ,दे रही चुनौती कर सहर्ष स्वीकार !दग्ध ज्वाल विकराल …

धरणी नववर्ष

क्रुर संस्कृति, निकृष्ट परंपरा कायह अपकर्ष हमें अंगीकार नहीं,धुंध भरे इस राहों मेंयह नववर्ष कभी स्वीकार नहीं ।अभी ठंड है सर्वत्र कुहासा , अलसाई अंगड़ाई है,ठीठुरी हुई धरा – …

पूछ रहा मुझसे स्वदेश

पूछ रहा मुझसे हिमालय,पूछ रहा वैभव अशेषपूछ रहा क्रांत गौरव भारत का, पूछ रहा तपा भग्नावशेषअनंत निधियाँ कहाँ गयी,क्यों आज जल रहा तपोभूमि अवशेष;कैसे लूटी महान सभ्यता प्राचीन,क्यों लुप्तप्राय …

रक्तिम्-भँवर

रक्तिम – भँवर ————–🌾रक्तिम – भँवर🌾——————–———————भर – भर आँसू से आँखें , क्या सोच रहे मधुप ह्रदय स्पर्श ,क्या सोच रहे काँटों का काठिन्य , या किसी स्फूट कलियों …

विक्षोभ – आलोक पाण्डेय

विक्षोभ ——————–स्तब्धित दिशाएँबेकली हवाएँव्यथित अंबरकह रहा आज -बेहद निर्मोही ,बडी निर्दयता से ‘ कैसी ‘ -मिट रही , क्यों कोई मिटा रहा लाज !नष्ट हो रहे प्राण हा ! …

नव प्रभात के रूप

बीति रजनीतम से कोसों दूरदीप्तएक स्वच्छसुदृढ , सुह्रदउदय नवल प्रभातधरा पर आतीस्वर्णिम रश्मियाँतप-त्यागप्रखर-पुँज कीअनंत शक्ति कोकरती समाहितसौम्यता, सारगर्भित तथ्य को परखती !विभा की रश्मियाँ अनंत ब्रह्मांड सेआतीदीखाती सत्य – …

नव प्रभात के रूप

बीति रजनीतम से कोसों दूरदीप्तएक स्वच्छसुदृढ , सुह्रदउदय नवल प्रभातधरा पर आतीस्वर्णिम रश्मियाँतप-त्यागप्रखर-पुँज कीअनंत शक्ति कोकरती समाहितसौम्यता, सारगर्भित तथ्य को परखती !विभा की रश्मियाँ अनंत ब्रह्मांड सेआतीदीखाती सत्य – …

राष्ट्रोत्कर्ष-उत्थान

यह राष्ट्र मुझे करता अभिसींचित् प्रतिपल मलय फुहारों से ,प्रतिदानों में मिले ठोकरों , धिकारों, दुत्कारों से ,जो लूट रहे मुझको हर क्षण ,उन कायर कुधारों से ,विविध द्रोहियों …

आहत ग्रामवासिनी मर्माहत कल ! – आलोक पाण्डेय

उम्र बीत गयी ज्यों दासता के तले,मरकर यों ही ना दु:ख भूलाया कभी ,मरना , है जीवन की एक दृढ कड़ीदेखा एक मरा है , अभी-अभी ! जीवन की …

धार में मिला किनारा

डूबा हूँ आँसुओं में, ले दर्द का सहाराये कम क्या मुझ पर अहसान यह तुम्हारावे और लोग होंगे व्यथित, लहरों के संग भटकेमुझको तो धार में ही,हरदम मिला किनारा …

स्वर्णिम भारत की बेटियाँ

संसार की सार अाधार हो तुमजीवन की हर सत्कार हो तुममंगल शांति सुविचार हो तुमहर वीर मन की पुकार हो तुमप्रतिपल मन कहता हे बेटीजंजीरों में जकडी तु लेटी …

आ जाना मेरे पास प्रिये !

—- आ जाना मेरे पास प्रिये ! —————————– ???????????????????????? अभि कल तक तुमने यूं ही प्यार किया ,अहो विलक्षणी ! तुने कैसा श्रृंगार किया,रूपसी! तु मुस्कुराकर यों ही विसार …

धरा का तु श्रृंगार किया है रे !

तू धीर, वीर ,गंभीर सदाजीवन को उच्च जिया है रे,तु दुःखियों को सींचित् कर श्रुति स्नेह सेकैसा ,ह्रदय रक्षण किया है रे !तु भाग्य विधाता से हरदमउन्नत ,मधुर विचार …

आर्त्त गैया की पुकार

कंपित! कत्ल की धार खडी ,आर्त्त गायें कह रही –यह देश कैसा है जहाँ हर क्षण गैया कट रही !आर्त्त में प्रतिपल धरा, वीरों की छाती फट रहीयह धरा …

काहें , भूल गयले रे भाई !

काहें भूल गयले रे भाई !अब आपन नया साल के मनाई !काहें भूल गयले रे भाई !जीवन के सौम्य – श्रृंगार केप्रकृति के बसंत-बहार केभारत के भव्य सत्कार केअन्याय …

मंगल नववर्ष मनाएँगे

गाँव-गाँव में शहर-शहर में,कैसी छायी उजियाली है;खेतों में अब नव अंकुर , नव बूंद सेछायेगी हरियाली है |बहुत कुहासा बीत चुकाअंतर्मन का ठिठोर मिटा,नवचेतन में नवबहार-बसंत,प्रकृति का सुंदर अभिलेखा …

वह – ~~’ आलोक पाण्डेय`

वहहर दिन आतासोचताबडबडाता,घबडाताकभी मस्त होकरप्रफुल्लता, कोमलता सेसुमधुर गाता…न भूख से ही आकुलन ही दुःख से व्याकुलमहान वैचारकधैर्य का परिचायकविकट संवेदनाएँगंभीर विडंबनाएँकुछ सूझते ध्यान में पद,संभलता, बढाता पग !होकर एक …

वीरों नववर्ष मना लें हम

है तिमिर धरा पर मिट चुकीआज भास्वर दिख रहे दिनमान ,शस्य – श्यामला पुण्य धरा कर रही ;वीरों तेरा जयगान !शुभ मुहुर्त्त में,महादेव को,सिंधु का अम्बु चढा लें हम…वीरों …

आ जा चित्तवन के चकोर

स्वर्णिम यौवन का सागर-अपारटकरा रहा तन से बारंबारविपुल स्नेह से सींचित् ज्वाररसमय अह्लादित करता पुकार अन्तःस्थल में उठता हिलोर आ जा ! चित्तवन के चकोर !सुरभित- सावन मधुमास बिताफाल्गुन …

अहा प्राण कहाँ !

हे मेरे भारत के लोगकैसा दुःखद ये संयोग;सह रहे जो आजतक वियोग,क्या मिल पायेगा कोई सफल योग !नहीं सफल योग मुस्कान कहाँजीवन जीने की जान कहाँसत्य की सुंदर अप्रतिम …

मंगलमय पुकार करूँ

यदि जीवित रहूँ माते, तेरा ही श्रृंगार करूँअर्पण करूँ सर्वस्व तूझे, हर त्याग से सत्कार करूँ;हो त्याग ऐसा वीरों सी, कलुषित विविध विकार हरूँ पुष्पित – पल्लवित कर दूँ …

आर्यावर्त की गौरव गाथा

भ्रमण करते ब्रह्मांड में असंख्य पिण्ड दक्षिणावर्तसुदुर दिखते कहीं दृग में अन्य कोई वामावर्तहर विधा की नवीन कथा में निश्चय आधार होता आवर्तसभी कर्मों की साक्षी रही है, पुण्य …