Author: C.M. Sharma

इश्क़ की हद्द से…सी.एम्.शर्मा (बब्बू)…

(जनाब असरार-उल-हक़ मजाज़ साहिब की ग़ज़ल है….”अक़्ल की सतह से कुछ और उभर जाना था ….  इश्क़ को मंज़िल-ए-पस्ती से गुज़र जाना था”… इसी ज़मीन में लिखी ग़ज़ल आपकी …

लौ लगी कृष्णा तेरी मन में…सी.एम्.शर्मा (बब्बू)…

लौ लगी कृष्णा तेरी मन में…सृष्टि दैदीप्य लगे कण कण में…मन पथिक हर राह निहारे…कान्हा आएंगे कौन से द्वारे…आँख न मीचे मन व्याकुल ये…अब आएंगे प्राण प्यारे….देखूं आतुर हर …

छंद – त्रिभंगी – सी.एम्.शर्मा (बब्बू)…

विधा: छंद – त्रिभंगी – एक प्रयास….(मेरी जानकारी में यह छंद सबसे कठिन छंदों की श्रेणी में आता है… ३२ मात्रिक छंद के चार चरणों में कहीं भी यगण …

बचा दर्द-ए-कफ़न है और मैं हूँ…सी.एम्.शर्मा (बब्बू)…

महब्बत की अगन है और मैं हूँ….न मिटता ये दहन है और मैं हूँ….न पूछो हाल दिल मेरा फ़रिश्तो….बचा दर्द-ए-कफ़न है और मैं हूँ….नहीं अपना कहीं कोई जहां में…अलग …

मौन…हाइकु….सी.एम्.शर्मा (बब्बू)…

II मौन IIII हाइकु II१.राधा सा मौनसमाधिपाद कुञ्जकृष्णा मिलन२.मौन वरणजग का विस्मरणचिंता हरण३.बाहर मौननाद गूंजे भीतरमन ‘पागल’४.ब्रह्म मुहूर्तमन मौन सागरसूर्य वरण\/ सी.एम्.शर्मा (बब्बू) Оформить и получить экспресс займ на …

शब्दों के आँचल में…सी.एम्.शर्मा (बब्बू)

शब्दों के आँचल में भाव छुपा डाले…उनको हो न खबर तो ज़ख्म सिला डाले…कलम उठा कर अपनी उनको दे डाली…जीवन के सब अपने राग मिटा डाले….मेरी ग़ज़लें पढ़ कर …

पूजा…हाइकु….सी.एम्.शर्मा (बब्बू)….

II पूजा IIविधा: हाइकु१.मन का थालसात्विक भाव फूलपूजा सम्पूर्ण२.गुरु चरणत्यागे पांच विकारपूजा सफल३.मन के विकारपूजा अवरोधककर निस्तार4.टूटे ‘चौरासी’विकार बनवासीपूजा सुवासी\/सी.एम्.शर्मा (बब्बू) Оформить и получить экспресс займ на карту без …

ग़मों की ज़िन्दगी में तो कभी मकसद नहीं होते…सी.एम्.शर्मा (बब्बू)…

ग़मों की ज़िन्दगी में तो कभी मकसद नहीं होते…अगर जो ठान ले तो ग़म ख़ुशी सरहद नहीं होते…दफ़न नफरत हमेशा ही हुई है वक़्त-ए-दरिया में….मगर इस इश्क़ के हरगिज़ …

ज़िन्दगी इक सफर सुहाना है…सी.एम्.शर्मा (बब्बू)…

ज़िन्दगी इक सफर सुहाना है….गुनगुनाओ मधुर तराना है…..क्या मिला और रह गया क्या है…सोच कर ज़िन्दगी गँवाना है….चाहतें कब कहाँ हुईं पूरी…मन का संतोष ही खजाना है…भूल जाओ बिछड़ …

पायल….सी.एम्.शर्मा (बब्बू)…

पायल….न जाने कितने भावों को जन्म देती है….प्रियतमा के पैरों में….मन के तारों को झंकृत करती है….सांसों में स्वर सजाती है….शब्दों को अलंकृत करती है….रुनझुन रागों को जन्म देती …

माँ – वर्ण पिरामिड…सी.एम्.शर्मा (बब्बू)…

माँप्रेमसंसारअधिकारसतआचारइश्वर साकारहै चारों धाम द्वारIII सी.एम्.शर्मा (बब्बू) II Оформить и получить экспресс займ на карту без отказа на любые нужды в день обращения. Взять потребительский кредит онлайн на выгодных …

प्रेरणा….सी.एम्.शर्मा (बब्बू)…..

नाहक डरते हो तुम…..दुःख से कभी सुख से….कभी रौशनी से मुंह फेर लेते हो…कभी अँधेरे से घबराते हो….जान कर भी तुम…अपने को नहीं पहचानते….मैं हर पल तुम्हें उद्वेलित करती …

शब्द…वर्ण पिरामिड एवं डमरू…सी.एम्.शर्मा…

विधा :: वर्ण पिरामिड१.हैंशब्दआहटगर्माहटइश्क़ तरानाप्यार नज़रानाघर घर फ़साना २.हैनादनिशब्दजय घोषआत्मीय बोधअहम ब्रह्मास्मिसचराचर  स्वामी विधा : डमरू घर घर फ़सानाप्यार नज़रानाइश्क़ तरानागर्माहटआहटशब्दहैनादनिशब्दजय घोषआत्मीय बोधअहम ब्रह्मास्मिसचराचर  स्वामी II स्वरचित – सी.एम्.शर्मा …

तुम ठहर जाओ कभी…सी.एम्.शर्मा (बब्बू)…

(जनाब मिर्ज़ा ग़ालिब साहिब की एक ग़ज़ल है “आह को चाहिए इक उम्र असर होने तक…कौन जीता है तेरी ज़ुल्फ़ के सर होने तक” इसी ज़मीन में लिखी मेरी …

उसकी कोई खबर नहीं आती…सी.एम्.शर्मा (बब्बू)…

(जनाब मिर्जा ग़ालिब साहिब की एक ग़ज़ल है….”कोई उम्मीद बर नहीं आती…कोई सूरत नज़र नहीं आती”…. इसी ज़मीन में कोशिश की है मैंने ग़ज़ल लिखने की…. आपकी नज़र…)उसकी कोई …

इश्क़ पीना ज़ह्र पिलाना है…सी.एम्.शर्मा (बब्बू)….

( श्री नक्श लायलपुरी जी की ग़ज़ल….. यह मुलाक़ात इक बहाना है….प्यार का सिलसिला पुराना है… की ज़मीन में लिखी ग़ज़ल)तेरा अंदाज़ कातिलाना है….लूट कर चैन मुस्कुराना है…धूप खिलना …

मिलन – विदाई…सी.एम्.शर्मा (बब्बू)…

छत पे कोआ कांव कांव कर रहा है….कोई और तो अपना है नहीं…शायद…तुम आ रही हो कहीं…मिलोगी मुझसे तो बताऊंगा तुझे…जीना कितना दुश्वार था तेरे बगैर…दिन भी रात थी …

माटी…..वर्ण पिरामिड…..सी.एम्.शर्मा (बब्बू)….

हैमाटीसंस्कारअभिमानआत्म सम्मानचिर शान्ति शैयागोद में लेती मैया…..सी.एम्.शर्मा (बब्बू)…. Оформить и получить экспресс займ на карту без отказа на любые нужды в день обращения. Взять потребительский кредит онлайн на выгодных …

मौत भाग रही है…सी.एम्.शर्मा (बब्बू)…

मौत को मेरी ज़िन्दगी ने आईना दिखा दिया….अपने चेहरे को उसपे लगा दिया….मौत बदहवास हो भाग रही है…हर पल छुपती….कभी यहां…कभी वहां….अपनी पहचान भूल कर….अपने को मारने को…अपनी ही …

जय जयति नन्द के लाल…सी.एम्. शर्मा (बब्बू)…

जय जयति नन्द के लाल मदन गोपाल मेरे मन हरण…संग राधा मन मेरे बसहु कृपा करो राधा रमण….सर मोर मुकुट कपाल शशि बिम्ब सुन्दर अति सुंदरम…कदम्ब कुण्डल कर्ण शोभित …

नन्द के घर आये लाल…सी.एम्. शर्मा (बब्बू)….

नन्द के घर आये लाल….सब नाचें बिन सुरताल….नन्द के घर आये लाल….सब नाचें बिन सुरताल…..सांवली सूरत घुंघराले बाल…देख जग सारा भया निहाल…..कोई बिहारी कहे कोई गोपाल…सब नाचें बिन सुरताल…..कोई …

सृजन 1….सी.एम्.शर्मा (बब्बू) ….

सृजन करने निकला था….अपनी दुनियाँ का मैं….खुद को ग़ुम सा पाता हूँ….मैं खुद को पाना चाहता हूँ….हर कोई जानता है मुझे…पर मैं भूल जाता हूँ…कब अपनों में गैरों से…कब …

युग पुरुष अटल बिहारी वाजपेयी….

“बेनकाब चेहरे हैं,दाग बड़े गहरे हैं,टूटता तिलस्म,आज सच से भय खाता हूँ ।गीत नही गाता हूँ “(श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी)सच में तुमने तिलिस्म तोड़ दिया है….सब नेताओं को …

वतन इश्क़ से ऊंचा इश्क़ नहीं है…सी.एम्. शर्मा (बब्बू)…

सुनो तुम आजाद हिन्द के वासी….करना कभी तुम न हमसे किनारा…देकर लहू हमने सींचा वतन है….रहे ऊंचा मस्तक वतन ओ हमारा…धरम न जाती कुछ भी न देखा…वतन राह में …

भोला बम बम भोला…सी.एम्.शर्मा (बब्बू)….

II छंद – चौपाई IIकहते हैं शमशान निवासी, रोम रोम रम रहा सुवासी…आदि अंत का जो है ज्ञाता, महादेव वो है कहलाता..पी कर ज़हर अमृत देता वो, ऐसा वैरागी …