Author: ashutosh sinha

कलयुग यही कहलाता है

कलयुग यही कहलाता है कलयुग यही कहलाता है ये जमाना हुआ बुरे लोगों का, हर बक्त लगे ठोकर सा यहाँ……. दिन रात दर्द मिलता रहता है…………. जख्म ना भरता, …