Author: ANU MAHESHWARI

चेहरे के पीछे चेहरा – अनु महेश्वरी

चाहती हूँ समय को,अपनी मुट्ठी में कैद करलूँ,लोगो से बेपरवाह हो,ताजी हवा सासों में भरलूं।पर रोके किसी केसमय कब रुका है भला,यह मस्त अपने में,सबकुछ अतीत कर चला।फिक्र नहीं …

दिल न दुखाना – अनु महेश्वरी

 मदद करो जब औरो की तुमछोटा महसूस उसे न कराना।बोलो वाणी मुख से जब तुमकभी किसीका दिल न दुखाना।काम करवाओ जब किसी से,अपना रुतबा कभी न जताना।झुठ जितना भी …

दुनिया – अनु महेश्वरी

झूठ ने इतना पैर पसार लिया,विश्वास हिचकोले खाता अब।संदेह ने नज़रों में घर जो किया,भरोसा भी तो डगमगाता अब।दिल की कैसे कोई सुने जब,दिमाग ही हावी हो जाता अब।फ़रेब …

जब तू मुस्काती है – अनु महेश्वरी

दीवारें खिल उठती जब तू मुस्कुराती है,जीने की फिर से एक उम्मीद जगाती है।उताड़ चढ़ाव भरे जीवन के हर मोड़ पे,तेरे हँसने से मेरी ज़िन्दगी भी हर्षाती है।परेशान लम्हों …

तुम बस कान्हा को याद कर लेना – अनु महेश्वरी 

 जब कोई साथ न दे तेरा,लगे चारो ओर ही अँधेरा,गर तू सच्चे मन से पुकारेगा,कान्हा निश्चय तेरी सुध लेगा,तुम बस कान्हा को याद कर लेना,वो सबकी सुनता तेरी भी …

तू ही जग का पालन हार – अनु महेश्वरी

कान्हा कर सब पे उपकार,तू ही जग का पालन हार।इंसान तेरी ये माया,कभी समझ न पाया,हमे जो भी मिल रहा है,तेरे सहारे ही चल रहा है,फिर इंसान क्यो है …

सटीक निर्णय लेना – अनु महेश्वरी

 आज के राजनेताओं सेक्या अब उम्मीदे होगीइनकी बयानबाजी देखोसब ये लगते है ढोंगी।मतलब निकलते ही देखोमुँह फेर चले जाते हैचुनाव के पहले कैसे सबहाथ जोड़ फिर आते है।इनका न …

कान्हा कान्हा पुकारे ये दिल – अनु महेश्वरी 

कान्हा कान्हा पुकारे ये दिल रे,अपने भक्तो से आकर मिल ले।रात दिन लगी तेरी ही धुन रे,भक्तो की पुकार अब सुन ले,तुम दर्श आकर दिखा जाओ,सभी के गम को …

सबसे पहले है देश – अनु महेश्वरी

बधाई हो बधाई हो,स्वतंत्रता दिवस की सबको बधाई हो। पाने के लिए ये आज़ादी,पुर्वजों ने दी है कुर्बानी,देखो इसे अब न कोई, ज़ख्म दे जाए।बधाई हो बधाई हो,स्वतंत्रता दिवस …

खुदा का है दरबार – अनु महेश्वरी

 जग में हम सभी किरायेदार,दुनिया खुदा की है दरबार,अस्थायी है अपना निवास,बाकी बातें सभी निराधार|सभी को जाना है एकबार,मन में क्यों रखे फिर भार,ख़तम कर दिलों का मतभेद,अब न लड़े …

उलझा हुआ वो भी – अनु महेश्वरि

पुरुष शक्तिशाली या नारी,कोन किसपे परे है भारी,ये बहस तो चलती आयी है,सदियों तक चलती भी रहेगी।मेरा अनुभव तो कहता है,पुरुष भी मन से कोमल होते,अपने हर रिश्ते को …

तेरा सहारा मिला – अनु महेश्वरी

मुझे जीने की कोई चाहत न होती,अगर तुम्हे भी मुझसे उल्फत न होती।मिले गर हमेशा वफ़ा में वफ़ा हीकिसी ज़िन्दगी में क़यामत न होती।देखा पास से ज़िन्दगी तो ये …

इश्क कोई तिजारत नही है – अनु महेश्वरी

जब मिलन की इजाजत नहीं है,प्यार में फिर सदाकत नहीं है।शर्त कोई कभी हो न इसमें,इश्क कोई तिजारत नही है।आज तुम भूल बैठे हमें क्यों,अब तुम्हें क्या मुहब्बत नही …

चुप मत रहना – अनु महेश्वरी

कह दो जो तुम को है कहना,देखो तुम यूँ चुप मत रहना|पसरा घर में जो सन्नाटा,मुश्किल वो खामोशी सहना।जीवन मेरा तुझ बिन सूनाबस तू मेरे दिल का गहना|लोगो का …

जीवन – अनु महेश्वरी

कागज की नाव पानी मे बहाना याद है,जीवन में प्यार के सपने सजाना याद है|बेफिक्र दोस्तों के साथ दूर निकल जाना,घर आकर माँ की खूब डांट खाना याद है|रात …

कविता – अनु महेश्वरी

कविता लिखना मुझे है पसन्द,पर किसी बंधन में ना बंधना चाहती|जो आसानी से आ जाये समझ,ऐसी सरल भाषा में लिखना चाहती|कलम से निकली आवाज़ से,लोगो के दिलो को झकझोड़ना …

रिश्तों के मायने – अनु महेश्वरी

  रिश्तों के मायने जो समझ गया,जीवन जीना उसे रास आ गया।साथ जो मिले अपनो का यहाँ,बदला मौसम भी देखो भा गया।अनजान था सबसे महफ़िल में,मीठे दो बोल से वह …

हरी रहने दो ये धरती – अनु महेश्वरी

वृक्षो को रख, हरी रहने दो ये धरती,मत उजाड़ो, अपने मतलब से सृष्टि,विकास के नाम, चमन को जो उजाड़ाबंजर हुई धरा, तो कैसे होगा गुजारा।सूरज की तपती धूप को …

मुझे शिकवा ज़िन्दगी से नही – अनु महेश्वरी

मुझे शिकवा ज़िन्दगी से नही है,मुझे ईर्ष्या भी किसी से नही है।ज़खम मैंने खूब जीवन में झेले,मुझे उम्मीदें कहीं से नहीं है।अगर साथी ज़िन्दगी में न हो तो,शिकायत मेरी …

अनमोल है ज़िन्दगी – अनु महेश्वरी

सब को खुश करने में तो,मिले न सफलता ही कभी।सुनो सबकी करो मन की,खुश रह सकोगें तुम तभी।मुश्किल घड़ी आए तो,धीरज फिर धर लेना तुम।सब को खुश करने में,अपना …

तन्हा ज़िन्दगी – अनु महेश्वरी

 तन्हा हो जाती ज़िन्दगी’अपनों से जब दूर होते,खुद से बाते करने को,लोग तब मजबूर होते|दिल की बाते किस से करेकिस पे करे यहाँ एतबार,सच्चा साथी मिलना जो,हुआ है अब …

उलझी है ज़िन्दगी – अनु महेश्वरी

भागती सी ज़िन्दगी में जल्दी पाने की होड़ मची,खुद की खुदी के लिए लोग रोंदते औरो की ख़ुशी|फ़ुर्सत नहीं किसी के पास हर इंसान थका सा,ज़िन्दगी में अपनी बढ़ती …

ज़िन्दगी से शिकायत कैसी – अनु महेश्वरी

दर्द देती है, फिकी है कभी,फिर हसना भी सीखा रही,ज़िन्दगी से शिकायत कैसी,वह तो जीना ही सीखा रही|जुदाई है, गम देती है कभी,पर हर पल साथ निभा रही,ज़िन्दगी से …

झूठ को चलते देखा – अनु महेश्वरि

सच को सिसकते देखा मैंने,ईमान को बिकते देखा मैंने,धरती पे सच्चाई भी रहती,पर झूठ को चलते देखा मैंने। अनु महेश्वरि Оформить и получить экспресс займ на карту без отказа на …

बात बने – अनु माहेश्वरी

पत्थर में दिखे मूरत भगवन की जाने तो बात बने,निर्धन में मिले सूरत भगवन की माने तो बात बने,कहने को बड़ी बाते रहते सब ज्ञानी तैयार यहाँ,अपनों की परेशानी …