Author: Anil Mishra Prahari

आशाओं के दीप जलाना।

आशाओं के दीप जलाना।घोर अँधेरा घिरे डगर मेंबाधित पथ हो गली-नगर में,सूरज थका-थका दिखता होभाग्य धरा का तम लिखता हो।अम्बर पुलकित मारे ताना              …

आशाओं के दीप जलाना।

आशाओं के दीप जलाना।घोर अँधेरा घिरे डगर मेंबाधित पथ हो गली-नगर में,सूरज थका-थका दिखता होभाग्य धरा का तम लिखता हो।अम्बर पुलकित मारे ताना              …

तुझे मुस्कराना होगा।

सारे ख्वाब यहाँ पूरे नहीं होते पर सभी आधे-अधूरे नहीं होते, आशा के दीप जलाये रखअँधेरों को दूर भगाये रख, उजाले का इंतजार तो कर, दुर्दिन पर प्रहार तो …