Author: अंजली यादव

एक हकीकत ..

खामोशिया जिन्हें अच्छी लगती है,वो हरदम बोला नही करते।जब बोलते है तो..शब्दो को तौला नही करते।हम तो यूँ ही मुस्करा देते है..ऐसे ही सबसे उलझा नही करते।सब अपनी अपनी …

जिज्ञासा

मै बहुत कुछ लिखकर भूल जाना चाहती हु,कुछ सच,कुछ झूठे इस जमाने से मुकरना चाहती हु।है मेरी ख्वाहिश जैसे कुछ पागलो जैसेखुद से खुद में गुजर जाना चाहती हु..क्या …

जिंदगी एक पहेली

कभी रूठी,तो कभी उलझी है,कभी उम्मीद तो कभी सुलझी है।कभी साथ तो कभी अकेली है,बस जिंदगी एक पहेली है।।कभी संवरते वक़्त के साथ रूठी है,तो कभी रूठे वक़्त के …

आवाज़ कुछ बदलने की

बहुत दिनों से चले जा रहे इन्ही राहों पर,चलो कुछ राहों को बदला जाए। उलझनों से हाथ मिलाने की आदत सी है,चलो अब अचेतन मन को सुलझाया जाए। बात-बात …

हिस्से जिंदगी के

चलती रहेंगी यु ही यही राहे,पीछे छूटती यादो से ताल्लुक रखकर तो देखो! .अच्छाइयो के पन्ने तो अक्सर पलट ही जाते है ,जरा गलतियो के पन्नो से ताल्लुक रखकर …

मेरे सवाल

भीड़ में भी तन्हा क्यों है हम,क्यों टूटे टूटे से है हम.जोड़ते है जिन रिस्तो को हम,बड़ी सिद्दतों के साथ हर वक्त,क्यों पड़ जाते है अकेले हम.क्यों मन मेरा …

जरूरी तो नहीं

जितना हम किसी को चाहे ,वो भी हमें चाहे ,ये जरूरी तो नहीं .हमेशा सबके चेहरे पर,मुस्कराहट लाते रहना ,कोई हमारे अश्को को समझे ,ये जरूरी तो नहीं .हर …

ये रिश्ते ऐसे होते क्यों है

ये रिश्ते ऐसे होते क्यों है कभी प्रेम अटूट सा ,कभी साथ छूटते क्यों है .जीवन के इन पन्नो पर ,रिश्ते ऐसे होते क्यों है .सीखते सीखते अपनी जिंदगी …