Author: Karma Vaahini

बस यूँ ही

●मन के दरीचों से झांककर देखा जब यादों के तहखाने मेंकिसी बूढ़े दरख्त की सुखी सी टहनी पे झूलते,नजर मुझे मेरा बचपन आया।जहां उड़ते थे कागज के जहाज कभी,वो …

इंसान हूँ

थकी आवाजें,आबरू बगल में,दकियानूसी का लिबास पहनता हूँ।नफरत का व्यापार लगा,सौदा रूहानी कलपुर्जों का करता हूँ।।बिखरी साँसे,खुद से अपरिचित,खबरेें जुबां पे परिंदों की रखता हूँ।इस ज़हान की नुक्ताचीनी और बातें …

जज्बातों के दरीचे

छुपाकर आँखों से रूह के दरीचे पे एक ज़ज्बात रखा था।नाजुक ही सही,पर शख्शियत का तेरी उसमें पूरा हिसाब रखा था।।  Оформить и получить экспресс займ на карту без отказа …

मैं खामोश तो नहीं

ये जो खराशें हैं मेरी रूह की सूरत पेज़ख्मों का हिसाब तो नहीना ही गिनती मेरी शिकस्तों कीतरासा है मेरी शख्शियत को इन्ही खराशों नेये मेरी पहचान पे सवालिया …

बस यूँ ही

1.शिकायतों की आड़ में इश्क़ की आबरू को नंगा हमने खूब किया।जब खामियाँ दिखने लगी खुद में तो आईना हमने बदल लिया।।2.यादों के तहखाने में खोजता हूँ जिसे वो …

कुछ शब्द यूँ ही

१.गिरा दो ये इमारतें बंदिश की,रूह का लगाव इस जिस्म से अब सहा नहीं जाता।जलने दो रिवाजों के इस जर्जर मकान को धूँ धूँ करके ,जाहिलों की बस्ती में अब …

कुछ लफ़्ज़ों का हिसाब

१.बिकना था सो बिक गए पर अरमानों के चूल्हे में जलती आग आज भी है।इश्क़ हो ना हो,आरजू तुझसे गुफ्तगू की,दिल के किसी कोने में बाकी आज भी है।।२. सदियो …

कुछ लफ्ज़1. जिस्म का नही जनाब इस रूह का इम्तेहान लीजिए।आंखें ये फरेबी हैं,आप जज्बातों का तकाजा कीजिये।।2.लफ़्ज़ों की इस हेरा फेरी में सच को झूठ और झूठ को …

एक असमंजस ये भी

इन बिखरे हुए अल्फ़ाज़ों को समेट लूँ या चुप्पी का बेनाम हिस्सा बन जाने दूँ।इन बेगैरत पलों को सहेज लुँ या यादों का जहाज़ बनके उड़ जाने दूँ।इन कदमों …

Daastan Vajood Ki

टूटे हुए अल्फाज़ ही सही ,पर एक दास्तान तो है,ज़िन्दगी अधूरी ही सही ,पर एक फलसफा तो है|देखे हैं कितने ही वजूद मिटते यहाँ ,पर देखे हैं सिकंदर भी …

खुद से खुद की लड़ाई

किस की तलाश है ,और क्या ढूंढ लाये हैंपूरा पाने की चाह में,एक हिस्से पीछे छोड़ आये हैं.कोनसी डगर किस ओर लेकर जाए,मालूम नहींमगर जो पगडंडी घर तक जाती …