Author: Abnish

नदिया की लहरें – अवनीश सिंह चौहान

आईं हैं नदिया में लहरेंअपना घर-वर छोड़ केजंगल-जंगलबस्ती-बस्तीबहतीं रिश्ते जोड़ के मीठी यादें उदगम कीपानी में घुलती जातींसूरज की किरणें-कलियाँलहरों पर खिलती जातीं वर्तमान केहोंठ चूमतीमुँह अतीत से मोड़ के बहती धारा …

देवी धरती की – अवनीश सिंह चौहान

दूब देख लगता यह सच्ची कामगारधरती की मेड़ों कोसाध रही हैखेतों कोबाँध रही हैकटी-फटी भू कोअपनी-ही जड़ सेनाथ रही है कोख हरी करती हैसूनी पड़ी हुईपरती की दबकर खुदतलवों …

कविता

अवनीश सिंह चौहान हम जीते हैंसीधा-सीधा कविता काट-छाँट करती है कहना सरल किजो हम जीतेवो लिखते हैंकविता-जीवनएक-दूसरे मेंढलते हैं हम भूलेजिन खास क्षणों कोकविता याद उन्हें रखती है कवितायाद …

टुकड़ा कागज़ का

उठता-गिरता उड़ता जाए टुकड़ा कागज़ का कभी पेट की चोटों को आँखों में भर लाता कभी अकेले में भीतर की टीसों को गाता अंदर-अंदर लुटता जाए टुकड़ा कागज़ का कभी फ़सादों-बहसों …