Author: abhishek kumar upadhyay

अपनी सोच बदल नहीं पाया

मैं अपनी सोच बदल नहीं पाया तेरे लिए , तुझको देखा है मैने बंद कमरे में शिसक-शिसक के रोते हुए।   मैंने .. तुझे माँ के रूप में पाया था …

मिलो- नमिलो हकीकत में तुम

मिलो न मिलो हकीकत में तुम,  तो क्या गम है,   ख्वाबों का सहारा लेलेंगे .    किस्मत में नहीं किनारे अगर,     तेरी  यादों के समुन्दर में खुद को डुबो लेंगे.    …