Author: Abdullah Qureshi

मुझे क्यों नहीं समझते हो!

*मुझे क्यों नहीं समझते हो!!*जब मैं आब कहूँ, दरिया तुम समझते हो,सूल कहूँ जो मैं, शमशीर तुम समझते हो;इल्ज़ाम-तराशी की रिवायत, बनाकर एजेंडा इसे,दूसरों को घटिया, खुद को पाकीज़ा …

कविता – “काश”

“Kaaश”काश मीठी बातों से दुनिया पूरी होती,दो वक्त की भूख असल जिंदगी है।काश हर इंसान में इंसानियत होती,जाति-मज़हब असल जिंदगी है।काश जेबों में सबके अमीरी होती,तपती धूप असल जिंदगी …

कविता_ “राजनीति में आजकल”

राजनीति में आज़कल, चला नया रिवाज़ है,सत्ता की मुख़ालफ़त, देशद्रोह का अपराध है;ना बोलो गर कुछ भी, बेख़बरी का लगता इल्जाम है,निकला जो इक लफ्ज़ भी, ‘रासुका’ लगने को …

इरफान तू इक़ तारा था

आज हसीन शाम वहाँ हो रही होगी;दर पे मौला तेरे, कतारें खूब लग रही होगी,फरमाइशें लाखों यहाँ-वहाँ से पहुंच रही होगी,कि इररफ़ान,तेरी इक़ झलक पाने को, हूरें भी तरस …

कविता_ “अपनों से पहचान बढ़ाओ”

*अपनों से पहचान बढ़ाओ*दूरियां सारी अब मिटाओ ,अपनों से पहचान बढ़ाओ ;सिवईयां ईद की, इस बारी उनको ख़िलाओ ,अम्मी के हाथों का, हर पकवान चखाओं ;अपनों से पहचान बढ़ाओ …

कविता_ “क़ुदरत इस बारी”

*क़ुदरत इस बारी*कुदरत ने इस बारी, कैसा ये रूप दिखाया है;ज़ख्मों को उसके, अनदेखा हमने बनाया है।परत दर परत हम उसे, यूहीं क़ुरदतें रहें;रोती वसुधा ने, दर्द कई बार …

कविता_ “हम एक नाव पर सवार है”

हम एक नाव पर सवार हैं, मन में भरा क्यूँ इतना गुबार है;ना करो गुस्ताखियां ऐसी यहाँ, जाना तो सभी को उस पार है;क्यों बाँट रहे हो तुम इनको, …

इंतेहा ज़ुल्म की बहुत हुई

*इंतेहा ज़ुल्म की बहुत हुई*लिंचिंग की बेज़ा आदत, हदें सारी पार हुई,इस बारी पालघर में, इंसानियत तार तार हुई;बैरागी थे जो सह गये, उफ़्फ़ तलक भी ना हुई,मिलकर रब …

दिल लगा पाना थोड़ा दुश्वार है

कल तलक जिस जिसको मैं इग्नोर किया करता था,आज वे ही बढ़ बढ़कर, काम मेरा सराह रहे है।और जिनके एक लफ्ज़ को मैं, तस्बीह में पिरो दिया करता था,आज …

कविता_ “कि कोशिश बड़ी चीज है”

कब तक किस्मत को कोसोगे,मीन-मेख दूसरों में खोजोगें,क़दम बढ़ा जो, मिलना फिर लाज़िम है;कि कोशिश बड़ी चीज है।दूरी और नफ़रत छू मंतर हो जायेगी,ग़ैर-पराये की रस्में भस्म हो जायेगी,मान …

दर्दों-ग़म सारे मेरे

*दर्दों – ग़म सारे मेरे*आज सहने दें, सितम सारे तेरे,आज कहने दे, दर्दों-गम सारे मेरे;दिखता हूँ मैं खुश, इक राज है ये,पलकें भीगी और मन उदास है ये;जानता मैं …

तकलीफ़ -ए- मिडिल क्लास

“तकलीफ़ – ए – मिडिल क्लास”वबा-ए-मंज़र में देखो परेशाँ हर एक इंसान है;भूक मिटानी घर-बार की नहीं इतनी आसान है।मुफ़लिसी-ओ-मालदारी छुपती नहीं किसी के छुपाने से;वबाल-ए-वस्त बिरादरी, इससे आज …

दुनिया हमारी

“दुनिया हमारी”मतलब-बेमतलब की दुनिया ये सारी,मेहनत मजदूरी से चलती दुनिया हमारी;लेखा जोखा नहीं आने वाले कल का,आज का जुगाड़ लगाती दुनिया हमारी;जानें कित्ती ऊँची इमारतें बनाई हमनें,झुग्गी में साहब …

आख़िर बहन है

उस रोज़ बहन की आँखों में आँसू देखकर समझ आ गया;नज़रें झुकाकर चलना, बहुतों पर हमारा बड़ा एहसान है।✍️अब्दुल्लाह क़ुरैशी Оформить и получить экспресс займ на карту без отказа …

जज़्बातों की दुनिया

मंदिर हिन्दुओं के और मस्जिदें मुसलमानों की;मज़हब से पहचानी जाती जहाँ नस्लें इंसानों की।जाकर देखा जब मैनें भीड़ भरे बाज़ारों में;दौलत से आँकी जाती वहाँ इज़्ज़त इंसानों की।मिला जब …

ऐसी है ये उम्मीद

खालिस मजबूत किसी विश्वास पर टिकी होती है ये उम्मीद,टूटने पर आवाज नहीं लेकिन दर्द देती है ये उम्मीद।उम्मीद गर उनसे है तो कोई बात नहीं,लेकिन ख़ुद से है …