गूंजी किलकारी

मेरे घर आंगन में गूंजी किलकारी

आई इस बगिया में नव कलिका प्यारी

प्रतीक्षा में जिसके बरस भए

सुनने को जिसे कान तरस गए

खिली कली बगिया महकी

देख खुशहाली चिडिया चहकी

आज सुनाई दी है वह ध्वनि प्यारी

मेरे घर आंगन में गूंजी किलकारी

प्रसन्न है आज परिवार सारा

घर में आया खिलौना प्यारा है

प्रसन्न दादा-दादी प्रसन्न है माता

कर दिया सबको प्रसन्न तुने विधाता

सुनी रब ने फरियाद हमारी मे

रे घर आंगन में गूंजी किलकारी

आज दूर हटे हैं सब अंधेरे

खुशियां आई है आंगन मेरे

खुशी से पूरित जिसका पिता है

वो हमारी प्यारी ‘निवेदिता’ है

अब तो दिखती हे जीवन राह उजियारी

मेरे घर आंगन में गूंजी किलकारी

(20 जुलाई 2002 को पुत्री के जन्म पर रचित रचना)

रामगोपाल सांखला ‘गोपी’

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16 Comments

  1. chandramohan kisku 21/07/2017
    • Ram Gopal Sankhla 30/01/2019
  2. Shishir "Madhukar" 21/07/2017
    • Ram Gopal Sankhla 30/01/2019
  3. ANU MAHESHWARI 21/07/2017
    • Ram Gopal Sankhla 30/01/2019
  4. arun kumar jha 21/07/2017
    • Ram Gopal Sankhla 30/01/2019
  5. kiran kapur gulati 22/07/2017
    • Ram Gopal Sankhla 30/01/2019
  6. babucm 22/07/2017
    • Ram Gopal Sankhla 30/01/2019
  7. Sunder Devi 30/07/2017
    • Ram Gopal Sankhla 30/01/2019
  8. राजीव कुमार संत 30/07/2017
    • Ram Gopal Sankhla 30/01/2019

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