वो क्या है!

तुम हो कि हद मे रह नहीं पातेहम है कि यह सब सह नहीं पाते।वो क्या है जो तुम सुनने को बेताब होवो क्या है जो हम कभी कह नहीं पाते।वो क्या है जिसे दुनिया सुनने को बेताब हैवो क्या है जिसके लफ्ज़ कहे नहीं जाते।वो क्या है जिसकी राह रात भर तकते हैंवो क्या है जो दिन में देख नहीं पाते ।वो क्या है जो गुलों से भी नाजुक है वो क्या है जिसे तूफ़ान भी हिला नहीं पाते। वो क्या है जो समंदर से भी बड़ा हैवो क्या है जिसमे कतरे भी समां नहीं पाते।वो क्या है जिसे दुनिया भुलाने में लगी हैवो क्या है जिसके करिश्मे भुलाये नहीं जाते।वो क्या है जिसे आसानी से समझ लेते हैवो क्या है जो समझदार समझ नहीं पाते।वो क्या है जो हर मज़हब में मौजूद हैवो क्या है जिसे मज़हबी समझ नहीं पाते।वो क्या है जो ख़ास सभी का होता हैवो क्या है जिसके ख़ास सब रह नहीं पाते।वो क्या है जो लोगों को बदल देता हैवो क्या है जो इंसान बदल नही पाते।वो क्या है जो रूह में इस कदर मौजूद हैकि अक्सर ज़हन में उसे ला नहीं पाते।वो क्या है जो शरीक है हर कदम परवो क्या है जिस से कदम मिला नहीं पाते।वो क्या है जो में पूछता आया हूँ वो क्या है जो तुम सब बता नहीं पाते।

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15 Comments

  1. babucm 20/07/2017
    • दीपेश जोशी 20/07/2017
  2. Shishir "Madhukar" 20/07/2017
    • दीपेश जोशी 20/07/2017
  3. Bhawana Kumari 20/07/2017
    • दीपेश जोशी 20/07/2017
  4. Vivek Singh 20/07/2017
    • दीपेश जोशी 20/07/2017
  5. डी. के. निवातिया 20/07/2017
    • दीपेश जोशी 20/07/2017
  6. Bindeshwar Prasad sharma 20/07/2017
  7. दीपेश जोशी 21/07/2017
  8. arun kumar jha 21/07/2017
  9. Saviakna 22/07/2017
    • दीपेश जोशी 27/08/2017

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