रक्षा बंधन पे, दे दें यह उपहार, – अनु महेश्वरी

कोन तय करेगा हद क्या है,मेरे,चलने की,खाने की,बोलने की,हँसने की,घूमने की,कपड़ो की,मैं या मेरे अपने या यह समाज,क्यों हम इतना सोचते हमेशा,लोग क्या कहेंगे,या फिर, समाज क्या कहेगा?कोन है यह लोग,या फिर यह समाज?अगर लोगो से ही, समाज बनता है?तब, मैं भी तो, इन्ही लोगो में से एक हूँ,फिर तो, मैं भी इसी समाज का हिस्सा हूँ,फिर यह मेरी बात, क्यों नहीं सुनता?मेरी हदे कोन तय करेगा?माना मैंने, एक सीमा तो होगी,पर वह तय, कोन करेगा?मैं या फिर मेरे अपने,हर घर के अपने कुछ नियम होते,फिर अक्सर क्यों ऐसा होता है?कुछ गलत न हो जाए,इस डर से, हम अपने की ही आजादी, छीन लेते है,इससे कुछ गलत लोगोकी हिम्मत बढ़ती जा रही है,बेहतर तो यह हो,यह समाज अब सोते से जागे,जो औरो को परेशान करते है,वह भी तो अपनी हदे पार कर रहे,उनको ही, उनकी हद, अब बता दे,कोई भी मूक दर्शक न बने रहें,हो रही घटना का विरोध करे,सभी अपनी बहनों को इसबार,रक्षा बंधन पे, दे दें यह उपहार,न किसी को गलत नज़र से देखेंगे,और न ही किसीको ऐसा करने देंगे,और स्वच्छ समाज का निर्माण, हम करेंगे।बना रहे भाई बहन का यह निश्छल प्यार,सबको मुबारक हो रक्षा बंधन का त्यौहार। अनु महेश्वरीचेन्नई

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16 Comments

  1. Shishir "Madhukar" 18/07/2017
    • ANU MAHESHWARI 18/07/2017
  2. Bhawana Kumari 18/07/2017
    • ANU MAHESHWARI 18/07/2017
  3. डी. के. निवातिया 18/07/2017
    • ANU MAHESHWARI 18/07/2017
  4. arun kumar jha 18/07/2017
    • ANU MAHESHWARI 18/07/2017
  5. babucm 18/07/2017
    • ANU MAHESHWARI 18/07/2017
  6. Bindeshwar Prasad sharma 18/07/2017
    • ANU MAHESHWARI 18/07/2017
    • ANU MAHESHWARI 18/07/2017
    • ANU MAHESHWARI 20/07/2017

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