ख़्वाहिशें 

ख़्वाहिशेंkiran kapur gulati अज्ञात कवि 16/07/2017 No Commentsनर्म लबों के तलेदब के रह गईंवो ख़्वाहिशेंजिनकी  फ़रियाद भीहम कर न सकेदिल की कश्ती कोजज़्बात  की लहरों  परछोडा तो था लेकिनवो फ़ासला भी तयहम कर न सकेयूं तो मयस्सर हैंहमें दुनिया की नेमतेंजिसे चाहा पाया तो सहीपर हदें उसके दिल कीतय कर न सके

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4 Comments

  1. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 18/07/2017
  2. arun kumar jha arun kumar jha 18/07/2017
  3. C.M. Sharma babucm 18/07/2017

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