बचपन के पल पल

माँ की लोरी, दादी की राजा-रानी की कहानीआज बहुत याद आती है।पापा का कंधा, दादा के बाँहों का झुलाआज बहुत याद आता है।बचपन में जब भी नानी के घर जाँऊ,नाना नानी का मामा-मामी से चुराकर,माखन मिश्री खिलान,आज बहुत सताता है।बचपन मे शरारत कर छुप जाना,शरारत करने पर माँ का पीटना,पिटाई के बाद उसमे छुपा प्यार,आज बहुत रूलाता है।पढाई न करने पर पापा की डाँट,डाँट के  बाद हमें प्यार से समझानाआज समझ में आता है।बचपन में रूठ जाने पर,माँ का अपने हाथों से खिलाना,आज बहुत याद आता है।पता नहीं क्यों?हमें अपना बचपन,आज बहुत याद आता है। 

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20 Comments

  1. ANU MAHESHWARI 16/07/2017
    • Bhawana Kumari 16/07/2017
    • Bhawana Kumari 16/07/2017
  2. Bindeshwar Prasad sharma 16/07/2017
    • Bhawana Kumari 16/07/2017
  3. Madhu tiwari 16/07/2017
    • Bhawana Kumari 16/07/2017
  4. Anjali yadav 16/07/2017
    • Bhawana Kumari 17/07/2017
  5. arun kumar jha 16/07/2017
    • Bhawana Kumari 17/07/2017
  6. babucm 16/07/2017
    • Bhawana Kumari 16/07/2017
      • babucm 17/07/2017
  7. Shishir "Madhukar" 17/07/2017
  8. Bhawana Kumari 17/07/2017
  9. डी. के. निवातिया 17/07/2017
    • Bhawana Kumari 17/07/2017
    • Bhawana Kumari 18/07/2017

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