कैसे जान पाओगे मुझको

कैसे जान पाओगे मुझको

अगर तुमने प्रेम नही कियातो कैसे जान पाओगे मुझकोकिसी को जी भरकर नही चाहाकिसी के लिए नही बहायाआँखों से नीर  रात भरकिसी के लिए अपना तकिया नहीभिगोया कभीनही रही सीलन तुम्हारे कमरेमे अगर कभीतो कैसे जान पाओगे मुझको ||हृदय के अंतः पटल सेअगर नही उठी कभी तरंगेनही बिताई रात अगरचाँद और तारो के साथनही सुनी कभी नज़्मसाहिर, फ़ैज़ ग़ालिब, मीर , मज़ाज़ कीतो फिर तुम ही बताओकैसे जान पाओगे मुझको ||अगर तुम तड़पते  नही की जैसेचातक तरसता है बारिश के लिएया मछली पानी से बाहर आकर,तुम एक समुंदर के बीच पानी चारो ओरपर उसमे से पी नही सकतेदो घूट भी तुम, महसूस  नही  किया हैभीड़ मे भी अगर तन्हा नही होतेनही करते अगर बातें खुद सेतो कैसे जान पाओगे मुझको ||

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14 Comments

  1. Bhawana Kumari 16/07/2017
  2. Madhu tiwari 16/07/2017
  3. ANU MAHESHWARI 16/07/2017
  4. arun kumar jha 16/07/2017
  5. babucm 16/07/2017
    • shivdutt 17/07/2017
  6. Shishir "Madhukar" 17/07/2017
  7. डी. के. निवातिया 17/07/2017

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