रिमझिम बारिश निकली मेरी आखों से…सी.एम्. शर्मा(बब्बू)..

(22×5+2)दुनिया के पहरे से डरती रहती है…दिल आँगन में सबसे छिप के मिलती है….दिल में तेरे जो है वो बतला दे ना….शाम सवेरे यूं ही रूठी रहती है….मिलने को तो दिल दोनों के मिलते हैंफिर भी किस्मत अपनी ही न मिलती है…सपने तेरे मेरे थे, सो टूट गए….ग़ुरबत में उल्फत कब किस को मिलती है….रिमझिम बारिश निकली मेरी आखों से…आँख ‘चँदर’ क्यूँ तेरी सूजी लगती है….\/सी.एम्. शर्मा(बब्बू)

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20 Comments

  1. ANU MAHESHWARI 14/07/2017
    • babucm 15/07/2017
  2. Bindeshwar Prasad sharma 14/07/2017
    • babucm 15/07/2017
  3. डी. के. निवातिया 14/07/2017
    • babucm 15/07/2017
  4. bhupendradave 14/07/2017
    • babucm 15/07/2017
  5. Madhu tiwari 14/07/2017
    • babucm 15/07/2017
  6. arun kumar jha 14/07/2017
    • babucm 15/07/2017
  7. kiran kapur gulati 14/07/2017
    • babucm 15/07/2017
    • babucm 17/07/2017
  8. Anjali yadav 16/07/2017
    • babucm 17/07/2017
  9. Bhawana Kumari 17/07/2017
    • babucm 18/07/2017

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