मेरी स्वप्न पर IPC 144

मेरी स्वप्न पर IPC 144 ———————-मेरी फूटी छज्जा पुआल की झोपडी में खजूर पाटिया फटा गद्धा पर लेट कर तकते रहता था आसमान की ओर और सोरेन इपिल ,भुरका इपिल बूढ़ी परकोम को देख -देखकर डूब जाता था स्वप्नों की नगर में वन की फल ,फूल और मूल खाकर भूल जाता था पेट आग और स्वप्नों में मीठी -मीठी पकवान बनाता था मेरे सामने घूमते रहता था वह पकवानें पर जब से छीन लिया है हमसे आधा कट्ठा जमीन जंहा मैं पुआल और घास -फूस से झोपड़ी बनाया था छीन लिया हमसे पुरखों से मिली वन -जंगल और नदी जंहा से मुझे खाना मिलता था सुन रहा हूँ वहाँ सरकार नगर बसायेंगे हिल स्टेशन गरीबों को खदेड़कर अमीरों के लिए रहने की जगह बदल रही है वक्त बदल रहा है समाज की नियम अब मेरी स्वप्न पर भी सरकार ने लगाया है IPC 144 मेरी हक़ और अधिकार की पथ पर बनाई है ऊँची दिवार और मेरी निर्धनता उसके लिए बना है छाती फुलाकर जोर-जोर की हँसी। —————————————————————————————————-*सोरेन इपिल ,भुरका इपिल ,बूढी परकोम =संताल ज्योतिष के अनुसार तारों के समूह का नाम

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12 Comments

  1. Bindeshwar Prasad sharma 13/07/2017
    • chandramohan kisku 15/07/2017
  2. arun kumar jha 13/07/2017
    • chandramohan kisku 15/07/2017
  3. babucm 14/07/2017
    • chandramohan kisku 15/07/2017
  4. ANU MAHESHWARI 14/07/2017
    • chandramohan kisku 15/07/2017
  5. डी. के. निवातिया 14/07/2017
    • chandramohan kisku 15/07/2017
    • chandramohan kisku 15/07/2017

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