ढूंढते हैं By Poet Alok Upadhyay

चलो हंसने की कोई, हम वजह ढूंढते हैं,जिधर न हो कोई ग़म, वो जगह ढूंढते हैं !बहुत उड़ लिए ऊंचे आसमानों में यारो,चलो जमीं पे ही कहीं, हम सतह ढूंढते हैं !छूटा संग कितनों का ज़िंदगी की जंग में,चलो उनके दिलों की, हम गिरह ढूंढते हैं !बहुत वक़्त गुज़रा भटकते हुए अंधेरों में,चलो अँधेरी रात की, हम सुबह ढूंढते हैं !

Musician And Singer Alok Upadhyay

Musician And Singer Alok Upadhyay

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7 Comments

  1. ANU MAHESHWARI 13/07/2017
  2. chandramohan kisku 13/07/2017
  3. arun kumar jha 13/07/2017
  4. Bindeshwar Prasad sharma 13/07/2017
  5. babucm 14/07/2017
  6. डी. के. निवातिया 14/07/2017

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