जोड-तोड

जोडकर कविताओं के टुकडेबनाए हमने गीतों के मुखडेन गीतकार बन सके न कवि रहेकिसे सुनाएं हम अपने दुखडेहर सम्पाादक ने दिल तोडाकर दिए दिल के टुकडे-टुकडेकुछ भी ना हाथ आया हमारेबस अपनों से हम बिछुडेक्या औकात है हम जैसों कीजगत में कई गीतकार हैं भरे पडेआशावादी हैं हम करेंगे आशाभले ही इस दुनियां से जाना पडेहमें भी लिखना है कुछ ऐसाकि हो जाएं सम्पादक के रोंगटे खडे

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9 Comments

  1. Madhu tiwari 12/07/2017
  2. Shishir "Madhukar" 12/07/2017
  3. Bindeshwar Prasad sharma 12/07/2017
  4. ANU MAHESHWARI 12/07/2017
  5. डी. के. निवातिया 12/07/2017
  6. Arun kumar jha 12/07/2017
  7. Saviakna 12/07/2017
  8. babucm 13/07/2017

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