स्वीकारता हूँ

स्वीकारता हूँ _________मै स्वीकार करता हूँ तुम्हारी गरीबी हालत अत्याचार और शोषण के लिए मै भी एक कारण हूँ जब तुम छोटी थी कुल्ही धूल में खेलती रहती थी तभी तुम्हे सिखाया था की घर और समाज की इज्जत केवल औरतों के पास ही है और औरतों को ही उसे बचना होगा फिर तुम्हे बताया था सहना औरतों की गौरवशाली परम्परा है मै ही तो तुम्हारी मन की उर्वर मिट्टी में इस बीज को बोया था की औरतों की प्रतियोगिता औरतों से ही संभव है मर्द से नहीं मर्द श्रेष्ठ जात होते है और वे श्रेष्ठ ही रहेंगे औरत -औरतों में दुश्मनी मै ही बनाया था मै स्वीकार करता हूँ मै तुम्हारी सोई हुई असीम शक्ति को पनपने नहीं दिया दया -दर्द लज्जा की आभूषण से सजाकर मै तुम्हे अपाहिज बना दिया हूँ मै स्वीकार करता हूँ तुम्हारी हो रही अपमान के लिए मै भी कारण हूँ माँ गर्भ में लड़की तुम्हे स्वागत नहीं किया घर की बहु के रूप में भी नहीं तुम्हारी उन्नति को देखकर सभी तरह की कामों में बाधा का सृजन किया था हाँ ,मै यह भी स्वीकारता हूँ पर आज मेरी मन की चट्टान तोड़कर केवल यही बात है की कष्ट सह रही औरतों की आजादी युग बहुत दूर नहीं है।

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12 Comments

  1. ANU MAHESHWARI 11/07/2017
    • chandramohan kisku 13/07/2017
  2. Madhu tiwari 11/07/2017
    • chandramohan kisku 13/07/2017
  3. babucm 12/07/2017
    • chandramohan kisku 13/07/2017
    • chandramohan kisku 13/07/2017
  4. डी. के. निवातिया 12/07/2017
    • chandramohan kisku 13/07/2017
  5. Arun kumar jha 12/07/2017
  6. chandramohan kisku 13/07/2017

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