क्यों और कैसे – अनु महेश्वरी

क्यों और कैसे,किसी के भी, कुछ भी,कह देने भर से ही,आपा खो बैठते है लोग?क्यों और कैसे,उनकी समझ पे,ताले लग चुके होते है, और,इंसानियत भी भूल जाते है लोग?क्यों और कैसे,अपना संयम खो,कानून अपने हाथ में लें,हिंसा करने लगते है लोग?क्यों और कैसे,हैबानीयत पे,उतर आते है, और,अपनों को ही घाव दे जाते है लोग?क्यों और कैसे,भूल जाते है लोग,धर्म चाहे कुछ भी हो,सब से पहले हम इंसान है?क्यों और कैसे,किसी की आस्था,इतनी कमजोड़ हो सकती है,यह तो, अटूट होनी चाहिए थी?कोई भी धर्म, बैर कभी नहीं है सिखाता,वह बस जीने की, सरल राह है सिखाता,यह तो इंसान है, जो करवाहट घोल देता है,मह्जब के नाम पे, नामों को भी बाँट लेता है,अब जब आतंकबाद ने सर उठाया है,अगर इसे हमे सफलतापुर्वक हराना है,सब कुछ भूल के, हमे साथ आना है,बस एक ही बात, हमे याद रखनी है,सब से पहले हम इंसान है,सब से पहले हम इंसान है| अनु महेश्वरीचेन्नई

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18 Comments

  1. arun kumar jha 11/07/2017
    • ANU MAHESHWARI 12/07/2017
  2. Shishir "Madhukar" 11/07/2017
    • ANU MAHESHWARI 12/07/2017
    • ANU MAHESHWARI 12/07/2017
  3. chandramohan kisku 11/07/2017
    • ANU MAHESHWARI 12/07/2017
  4. Madhu tiwari 11/07/2017
    • ANU MAHESHWARI 12/07/2017
  5. Saviakna 11/07/2017
    • ANU MAHESHWARI 12/07/2017
  6. babucm 12/07/2017
    • ANU MAHESHWARI 12/07/2017
  7. Bindeshwar Prasad sharma 12/07/2017
    • ANU MAHESHWARI 12/07/2017
  8. डी. के. निवातिया 12/07/2017
    • ANU MAHESHWARI 12/07/2017

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