ढलता रहता हूँ — डी के निवातिया

ढलता रहता हूँ

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हर रोज़, दिन सा, ढलता रहता हूँ !बनके दिया सा, जलता रहता हूँ !!

कोई चिंगारी कहे, कोई चिराग !  यूँ नजरो में, बदलता रहता हूँ !!

सब के सब बन बैठे है सारथि मेरे !इशारो पे पग बांधे चलता रहता हूँ !!

सूरज था, झंझटी बादलो में घिर गया कभी छुपता, कभी निकलता रहता हूँ  !!

किनारे आँखों छाँव लेकर बैठा “धर्म” !खुद अपनी तपिश में जलता रहता हूँ !!

!!!डी के निवातिया

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16 Comments

  1. ANU MAHESHWARI ANU MAHESHWARI 11/07/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 18/07/2017
  2. arun kumar jha arun kumar jha 11/07/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 18/07/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 18/07/2017
  3. chandramohan kisku chandramohan kisku 11/07/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 18/07/2017
  4. Madhu tiwari Madhu tiwari 11/07/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 18/07/2017
  5. Saviakna Saviakna 11/07/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 18/07/2017
  6. C.M. Sharma babucm 12/07/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 18/07/2017
  7. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar Prasad sharma 12/07/2017
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 18/07/2017

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