आ जाना मेरे पास प्रिये !

—- आ जाना मेरे पास प्रिये ! —————————– ???????????????????????? अभि कल तक तुमने यूं ही प्यार किया ,अहो विलक्षणी ! तुने कैसा श्रृंगार किया,रूपसी! तु मुस्कुराकर यों ही विसार ली,पाँव , चमकती दुनिया में कैसे पसार ली ;संस्कारों में क्या था कमी ,कि ह्रदय का मैं नहीं था धनी ?पर तडपता हुआ जब कोई छोड दे,यौवनी, तुम्हारा ह्रदय तोड दे ,तब आ जाना मेरे पास प्रिये,मेरा ह्रदय विशाल खुला है,खुला ही रहेगा तुम्हारे लिए !सुन्दरी , रुप की सागर हो तुम,कमलिनी जितना खिलाओगी खिल जाएँगे,अाज मेरी तुझे आवश्यकता कहाँ -चाहनेवाले अनेक अवश्य मिल जाएँगे |जब दर्पण तुम्हे डराने लगे,यौवन भी दामन छुडाने लगे,तब त्वरित मेरे पास आना प्रिये,दृष्टि स्नेहिल रहेगी तुम्हारे लिए !सौम्यता,शुद्धता होती है प्यार में,पर प्यार शर्त्तों पे तुमने किया;थोडा आँखें चार क्या हुयी संचरित,बुझाने लगी धवल चाँदनी की दियाजब अपनी दृष्टि में गिरने लगो;उजाले में भी हो अंधेरी घिरने लगो,नि:संकोच आ जाना पास मेरे प्रिये,श्रद्धा से पुलकित,दीपक आलोकित रहेगा तेरे लिये ! °°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°° ???????????????????????? © ✍???? कवि आलोक पाण्डेय

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6 Comments

  1. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar Prasad sharma 08/07/2017
  2. Madhu tiwari madhu tiwari 08/07/2017
  3. chandramohan kisku chandramohan kisku 08/07/2017
  4. arun kumar jha Arun kumar jha 09/07/2017
  5. C.M. Sharma babucm 10/07/2017

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