दूसरो की तलाश में

कवि: शिवदत्त श्रोत्रियजब भी भटकता हूँ किसी की तलाश मेंथक कर पहुच जाता हूँ तुम्हारे पास मेंतुम भी भटकती हो किसी की तलाश मेंठहर जाती हो आकर के मेरे पास मेंहर दिन भटकते रहे चाहे इस दुनियाँ मेंमिलते रहे आपस में दूसरो की तलाश में ||

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12 Comments

  1. डी. के. निवातिया 07/07/2017
  2. ANU MAHESHWARI 07/07/2017
  3. Bindeshwar Prasad sharma 08/07/2017
    • shivdutt 10/07/2017
  4. madhu tiwari 08/07/2017
  5. arun kumar jha 08/07/2017
  6. babucm 10/07/2017

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