कुछ प्रश्न अनसुलझे से – अनु महेश्वरी

आजकल अक्सर जब अकेली रहती हूँ,काफी सवाल मेरे मन में उमड़ते रहते है,कुछ बाते समझने की कोशिश करती हूँ,पर कुछ प्रश्न, अनसुलझे से रह जाते है|

क्यों अक्सर जाने अनजाने लोग,एक दूसरे से मुक़ाबला करते है?

क्यों बेमतलब की बातों में लोग,बहस कर अपना समय गवाते है?

क्यों अक्सर बिना जरुरत के लोग,बिन पूछे ही सलाह देने लग जाते है?

क्यों दूसरे की उन्नति देख लोग,अंदर से ईर्षापूर्ण नज़र रखते है?

क्यों, ठीक क्या है, जानते हुए भी लोग,बुराई का साथ छोड़ ही नहीं पाते है?

काश अपनी बाते थोपना छोड़ लोग,औरो की भावनाओं को भी आदर दे|बस कानून व्यवस्था को ध्यान में रख,खुद जिए और औरो को भी जीने दे|

इतना मुश्किल भी तो नहीं है ज़िन्दगी,जितना जटिल हमने इसे बना दिया है,क्यों हम यह बात समझ ही नहीं पाते,मिल कर रहने से, ज़िन्दगी भी हसीन है|

अनु महेश्वरीचेन्नई

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18 Comments

  1. SARVESH KUMAR MARUT 02/07/2017
    • ANU MAHESHWARI 02/07/2017
  2. babucm 02/07/2017
    • ANU MAHESHWARI 02/07/2017
  3. arun kumar jha 02/07/2017
    • ANU MAHESHWARI 02/07/2017
  4. madhu tiwari 02/07/2017
    • ANU MAHESHWARI 02/07/2017
  5. Shishir "Madhukar" 02/07/2017
    • ANU MAHESHWARI 02/07/2017
  6. डी. के. निवातिया 02/07/2017
    • ANU MAHESHWARI 02/07/2017
  7. Kajalsoni 03/07/2017
    • ANU MAHESHWARI 03/07/2017
  8. bindeshwar prasad sharma 03/07/2017
    • ANU MAHESHWARI 03/07/2017
  9. Ram Gopal Sankhla 03/07/2017
    • ANU MAHESHWARI 03/07/2017

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