टूटे सपने

खुली आँखों में कई टूटे सपने गुजर गए,हुई आँख बंद सपने बूँद-बूँद बह गए।चलते कदम डगमगाते है अब,आँखों से मेरी आँखे घबराते है अब,सपने अब भी देखता हूँ पर नींद थम गए।इस बार कुछ अच्छा सबक पाया,अपनों को रोता और रोतो को हँसता पाया।फिर से वही पे पाया खुद को,जँहा मैंने छोड़ा था अपनों को,हँसता हुँ अब भी पर दिल को रोता पाया।

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14 Comments

  1. SARVESH KUMAR MARUT 02/07/2017
  2. babucm 02/07/2017
    • ajay921 02/07/2017
    • ajay921 02/07/2017
  3. arun kumar jha 02/07/2017
    • ajay921 02/07/2017
    • ajay921 02/07/2017
  4. madhu tiwari 02/07/2017
  5. ajay921 02/07/2017
  6. डी. के. निवातिया 02/07/2017
    • ajay921 02/07/2017
  7. ANJALI YADAV 04/07/2017

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