अमिट रिश्ते…सी.एम् शर्मा (बब्बू)….

खाली सा मकाँ है…ईंट पत्थरों का….कभी बोलते थे खिड़की दरवाज़े….घंटियाँ बजती थी बच्चों की आवाज़ में…कभी-कभी कोई कर्कश आवाज़…झकझोर जाती थी दीवारों को….मीठे नमकीन पल थे ये सभी….तीखी मिर्ची सा स्वाद भी था जिनमें कभी…ज़िन्दगी चल रही थी यूं ही….पर आज…..सब वीरान सा….हर तरफ खामोशी सी पसरी है…दिल की धड़कन भी सहमी सी चलती है…टूट न जाए खामोशी कहीं…रिश्ता कहाँ टूटता है….जिनमें ज़िन्दगी के दस साल गुज़ारे थे हमने…मन बार बार आज देखता है….उन्हीं ईंट पत्थरों को….आँखों से छू के हर कोने को…हर दीवार को…यहाँ कभी तस्वीर हुआ करती थी…बच्चों की…तो वहां मेरी…रिश्ते भी…आँगन के पौधों की तरह हैं….देखभाल ज़रूरी है….प्यार से सींचने के लिए…विश्वास ज़रूरी है…धूप से बचाने के लिए…छाँव…एक सुखद अहसास….सब पन्ने ज़िन्दगी के अब…सिमट गए दिल के कोने में…अमिट हो कर…ईंट पत्थरों का रिश्ता….बच्चों…पौधों का रिश्ता…और रिश्ता अपना टूटने का…पत्थर पे एक लकीर की तरह….अमिट…..\/सी.एम् शर्मा (बब्बू)

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18 Comments

  1. डी. के. निवातिया 01/07/2017
    • babucm 03/07/2017
  2. arun kumar jha 01/07/2017
    • babucm 03/07/2017
  3. Shishir "Madhukar" 01/07/2017
    • babucm 03/07/2017
  4. ANU MAHESHWARI 01/07/2017
    • babucm 03/07/2017
  5. Meena Bhardwaj 01/07/2017
    • babucm 03/07/2017
  6. SARVESH KUMAR MARUT 02/07/2017
    • babucm 03/07/2017
  7. madhu tiwari 02/07/2017
    • babucm 03/07/2017
  8. Kajalsoni 03/07/2017
    • babucm 04/07/2017
  9. bindeshwar prasad sharma 03/07/2017
    • babucm 04/07/2017

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